VHS प्रमुख अरुण पाठक पर दर्ज नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधडी मामले में उच्च न्यायालय ने लगाया गिरफ्तारी पर रोक...

विवादास्पद बयान और विवादित पोस्टरों से सुर्खियों में आए विश्व हिंदू सेना प्रमुख अरुण पाठक ने जेल से छूटने के बाद पहली बार वीडियो जारी कर नौकरी दिलाने के नाम पर प्रयागराज विश्वविद्यालय के विधि छात्र कौस्तुभ त्रिपाठी द्वारा धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज भेलूपुर थाने में दर्ज मुकदमें को लेकर अपना वक्तव्य दिया है.

VHS प्रमुख अरुण पाठक पर दर्ज नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधडी मामले में उच्च न्यायालय ने लगाया गिरफ्तारी पर रोक...

वाराणसी,भदैनी मिरर। विवादास्पद बयान और विवादित पोस्टरों से सुर्खियों में आए विश्व हिंदू सेना प्रमुख अरुण पाठक ने जेल से छूटने के बाद पहली बार वीडियो जारी कर नौकरी दिलाने के नाम पर प्रयागराज विश्वविद्यालय के विधि छात्र कौस्तुभ त्रिपाठी द्वारा धोखाधड़ी के आरोप में दर्ज भेलूपुर थाने में दर्ज मुकदमें को लेकर अपना वक्तव्य दिया है. साथ ही उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी भी व्हाट्सअप की है.

कोर्ट ने लगाया गिरफ्तार पर रोक

भेलूपुर थाने में अरूण पाठक के खिलाफ कौस्तुभ त्रिपाठी की तहरीर पर दर्ज आईपीसी की धारा 419, 420, 504 और 506 के तहत दर्ज मुकदमें में उच्च न्यायालय ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा है की यह सभी धाराएं 7 साल से कम सजा वाली है इसलिए रोक लगाई जाती है.वीडियो जारी कर अरुण पाठक ने कहा है की उनकी पहचान कौस्तुभ त्रिपाठी से वर्ष 2015 में अस्सी घाट पर एक कार्यक्रम में हुई थी.

अरुण का कहना है की कौस्तुभ त्रिपाठी एक दिन मेरे घर आया और मेरा लैपटॉप चुरा लिया. खोजबीन में पता चला कि लैपटॉप कास्तुक के पास है. पूछने पर उसने कहा की आपके सारे कार्यक्रम के रिकॉर्ड इस लैपटॉप में हैं में हैं. मैं इसे तोड़कर आपका करियर बर्बाद कर दूंगा. अरुण का कहना है की तत्काल इसकी शिकायत थाने पर की जिसके बाद आईपीसी की धारा 379, 504 और 406 में एफआईआर किया गया. पुलिस ने लैपटॉप बरामद कर मुझे दे दिया.