बहन ने भाइयों की रक्षा के लिए धूमधाम से मनाया भैया दूज का पर्व...

चंदौली में बहनों ने भाई की रक्षा और दीर्घायु के लिए धूमधाम से भैया दूज का पर्व मनाया.

बहन ने भाइयों की रक्षा के लिए धूमधाम से मनाया भैया दूज का पर्व...

चंदौली, भदैनी मिरर। भैया दूज के दिन गोधन कूटने की अनोखी परंपरा को निभाते हुए भैया दूज का पर्व बुधवार को बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। भैया दूज को आमतौर पर गोधन के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन उत्तर भारत के कई राज्यों में बहनें अपने भाइयों को शाप देकर उन्हें जीवित करने की अनोखी परंपरा निभाती हैं। मान्यता है कि इस शाप से भाइयों का मृत्यु का डर नहीं होता। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी गोधन कूटने की परंपरा को महिलाओं ने निभाया। और गोधन के मौके पर बहने भाइयों को खूब को कोसती हैं, और उन्हें गालियां भी देती हैं। यहां तक कि उन्हें मर जाने का भी शाप देती हैं। ऐसा अनुसरण कर सभी महिलाओं ने बुधवार को पूजा अर्चना किया ‌‌

हर साल गोधन पूजा करने वाली ऐश्वर्या केसरी बताया कि गोधन पूजा करने वाली महिलाएं सभी उम्र की होती हैं। इसमें शादीशुदा से लेकर कुंवारी लड़की भी इस पर्व को मनाती हैं। इस दिन घर के बाहर सभी महिलाएं सामूहिक रूप से गोबर से चौकोर आकृति बनाती हैं।जिसमें यम और यमी की गोबरसही प्रतिमा बनाई जाती है। इसके अतिरिक्त सांप बिच्छू आदि की आकृति भी बनाई जाती है। महिलाएं पहले इसकी पूजा करती हैं। फिर उन्हें डंडे से कूटा जाता है। वही आकृति के भीतर चना,ईंट नारियल, सुपारी और वह कांटा भी रख दिया जाता है। इस दौरान महिलाएं गीत और भजन भी गाती है। उन्हें कुछ लेने के बाद उस में डाले गए चने को निकाल लिया जाता है, फिर सभी बहने अपने अपने भाइयों को तिलक लगाकर इसे खिलाती है इस दौरान भाई अपनी बहनों को उपहार भी देते हैं।

महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा काफी प्राचीन है।जिसे सभी लोग पूरी आस्था से मनाती हैं। इस परंपरा के पीछे मान्यता है कि द्वितीया के दिन भाइयों को गालियां और शाप देने से उन्हें यमराज का भी भय नहीं होता। गोधन को यम दित्तीया भी कहा जाता है। महिलाओं ने यह भी बताया कि इस पूजा अर्चना की एक कथा है।जिसमें प्राचीन काल से एक राजा के बेटे की शादी थी राजा ने अपनी विवाहित पुत्री को भी बुलाया था। दोनों भाई बहन में अपार स्नेह था बहन जब भाई की बारात में शामिल होने जा रहे थे,तो उसने लोगों को यह कहते हुए सुना कि क्योंकि राजा की बेटी ने अपने बेटे की कभी गाली नहीं दी। इसलिए वह बारात के दौरान ही मर जाएगा। इसके बाद बारात निकलने के रास्ते में बहन ने अपने भाई को खूब गालियां दी, और रास्ते में जो भी सांप बिच्छू दिखाई दिया। उन्हें मारती और आंचल में डालती चली गई। जब वह घर लौटी तो उसके भाई के प्राण लेने के लिए यमराज उनके घर आए हुए थे। लेकिन यमराज ने जब भाई बहन का प्यार देखा तो वह राजा के बेटे का प्राण लिए बिना ही यमपुरी लौट गए।

संवाददाता कार्तिकेय पांडेय