ज्ञानवापी प्रकरण: मस्जिद के वजूखाने में मिले कथित शिवलिंग के कार्बन डेटिंग की मांग कोर्ट ने की खरीज, SC ने दिया था स्थान को सुरक्षित करने का आदेश...

ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की जांच के मामले में शुक्रवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई हुई। जिला जज ने शिवलिंग की जांच की मांग को खारिज कर दिया है।

ज्ञानवापी प्रकरण: मस्जिद के वजूखाने में मिले कथित शिवलिंग के कार्बन डेटिंग की मांग कोर्ट ने की खरीज, SC ने दिया था स्थान को सुरक्षित करने का आदेश...

वाराणसी,भदैनी मिरर। ज्ञानवापी में मिले कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की जांच के मामले में शुक्रवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सुनवाई हुई। जिला जज ने शिवलिंग की जांच की मांग को खारिज कर दिया है। बता दें की पांच हिंदू महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिली शिवलिंग जैसी संरचना की उम्र, लंबाई और चौड़ाई का पता लगाने के लिए इस वैज्ञानिक जांच की मांग की थी। जांच के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश देने की अपील की गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में कुल 58 लोगों को एंट्री दी गई थी।

कोर्ट के ऑर्डर के बाद हिंदू पक्ष के एडवोकेट शिवम गौड़ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कथित शिवलिंग मिलने की जगह को सुरक्षित और संरक्षित किया जाए। इसका हवाला देते हुए जिला कोर्ट ने कार्बन डेटिंग या अन्य वैज्ञानिक पद्धति से जांच की मांग खारिज कर दी है। पहले की तरह आज भी याचिका लगाने वाली महिलाओं में से राखी सिंह कोर्ट में मौजूद नहीं थीं। बाकी चार महिलाएं सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक और लक्ष्मी देवी सुनवाई के दौरान मौजूद थीं।

इस मामले में ज्ञानवापी मसाजिद कमेटी ने कहा था- कथित शिवलिंग की वैज्ञानिक जांच की कोई जरूरत नहीं है। हिंदू पक्ष ने अपने केस में ज्ञानवापी में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष देवी-देवताओं की पूजा की मांग की है। फिर यह शिवलिंग की जांच की मांग क्यों कर रहे हैं...? हिंदू पक्ष ज्ञानवापी में कमीशन की ओर से सबूत इकट्‌ठा करने की मांग कर रहा है। सिविल प्रक्रिया संहिता में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

कमेटी ने दलील दी थी कि 16 मई, 2022 को एडवोकेट कमिश्नर के सर्वे के दौरान मिली आकृति पर असमंजस है। उससे संबंधित आपत्ति का निपटारा भी नहीं हुआ है। 17 मई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने भी आकृति मिलने वाली जगह को सुरक्षित रखने के लिए कहा है। ऐसे में वहां खुदाई या अलग से कुछ भी करना उचित नहीं होगा।


वहीं इस मामले में याचिका लगाने वाली महिलाओं का कहना था कि हमारे मुकदमे में दृश्य या अदृश्य देवता की बात कही गई है। सर्वे के दौरान मस्जिद के वजूखाने से पानी निकाले जाने पर अदृश्य आकृति दृश्य रूप में दिखाई दी। ऐसे में अब वह मुकदमे का हिस्सा है। ऐसे में उस आकृति को नुकसान पहुंचाए बगैर उसकी और उसके आसपास के एरिया की वैज्ञानिक पद्धति से जांच जरूरी है। बीती 11 अक्टूबर को दोनों पक्ष की बहस खत्म हुई तो कोर्ट ने अपना ऑर्डर सुरक्षित रखते हुए सुनवाई की अगली डेट 14 अक्टूबर तय की थी।