काशी के घाट पर बेहोश मिला था कर्नाटक का गोपी, चिकित्सकों ने मौत के मुंह से निकाला, परिवार ने PM का जताया आभार...

डाक्टरों को भगवान का दर्जा दिया गया है, क्योंकि वही एक ऐसा शख्स है, जो किसी को मौत के मुंह में जाने से बचा सकता है. तिल-तिल मरते किसी इंसान को जिंदगी दे सकता है और खोई हुई उम्मीदों को जीता-जागता उत्साह दे सकता है. आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों की टीम ने भी कुछ ऐसा ही किया, जिन्होंने कर्नाटक के एक युवक की जान बचाई है.

काशी के घाट पर बेहोश मिला था कर्नाटक का गोपी, चिकित्सकों ने मौत के मुंह से निकाला, परिवार ने PM का जताया आभार...

वाराणसी, भदैनी मिरर। डाक्टरों को भगवान का दर्जा दिया गया है, क्योंकि वही एक ऐसा शख्स है, जो किसी को मौत के मुंह में जाने से बचा सकता है. तिल-तिल मरते किसी इंसान को जिंदगी दे सकता है और खोई हुई उम्मीदों को जीता-जागता उत्साह दे सकता है. आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों की टीम ने भी कुछ ऐसा ही किया, जिन्होंने कर्नाटक के उस युवक की जान बचाई है, जो कि चार माह पहले घाट पर बेहोश होकर गिर गया था. नाविकों ने उसे 26 दिसंबर को बीएचयू हॅास्पिटल में एडमिट कराया था. बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज किया और आज उसके शरीर के अंग काम करने लगे हैं.

कर्नाटक के बेल्लारी से दिसंबर में अकेले काशी की सैर पर आए युवक गोपी (29) घाट पर अचानक गिर गए, वे बेहोशी हालत में पड़े थे. घाट पर मौजूद नाविकों की नजर पड़ी तो उन्होंने पहले गोपी को पास के हॅास्पिटल में भर्ती कराया, उसके बाद उन्हें बीएचयू  इमरजेंसी वार्ड में लाया गया जहां न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया।



न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर विजयनाथ मिश्रा, डॉ. अभिषेक पाठक ने अपनी टीम के साथ मरीज का इलाज शुरू किया. प्रो. मिश्रा के अनुसार करीब चार महीने के इलाज के दौरान डेढ़ महीने आईसीयू में इलाज हुआ, फिर वार्ड में शिफ्ट किया गया. अब मरीज के हाथ, पैर सहित शरीर की अन्य नसें काम करने लगी हैं.

डॉक्टर अभिषेक पाठक कहना है कि मरीज को जीबी सिंड्रोम हो गया था. इसको गिया बारी सिंड्रोम कहा जाता है. इसमें मरीज की नसों में सूजन आता है और काम करना बंद कर देती हैं. मरीज के इलाज में न्यूरोलॉजी विभाग की टीम के साथ ही आईसीयू की टीम ने भी पूरा सहयोग किया. वहीं मरीज और उसके परिजनों ने जहां डॉक्टर के इलाज की सराहना की है और उनका आभार जाताया, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसके लिए बधाई दी है कि उनकी पहल पर बनी सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलीं है.