वाराणसी शहर दक्षिणी में काटें की टक्कर! पलटेगी तस्वीर या कायम रहेगा इतिहास, पढ़ें समीकरण...

Tough fight in Varanasi city southern assembly elections. वाराणसी के आठ विधानसभा में दक्षिणी विस पर बीजेपी का कब्जा रहा है।

वाराणसी शहर दक्षिणी में काटें की टक्कर! पलटेगी तस्वीर या कायम रहेगा इतिहास, पढ़ें समीकरण...
शहर दक्षिणी के प्रत्याशी।

वाराणसी,भदैनी मिरर। चुनावी घमासान के बीच वाराणसी की आठ विधानसभाओं में दक्षिणी विधानसभा सीट पर इस बार काटें की टक्कर होती दिख रही है। दक्षिणी विस सीट वह इलाका है जहां इस काशी नगरी को बसाने वाले बाबा विश्वनाथ का धाम है। जगत का पालन-पोषण करने वाली मां अन्नपूर्णा का विशाल प्रांगण भी इसी क्षेत्र में है। काशी के ज्यादातर तीर्थ स्थल और पर्यटन स्थल भी इसी इलाके में हैं। अब तो बनकर तैयार श्री काशी विश्वनाथ धाम भी मतदाताओं को लुभा रहा है।  इस सीट से जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) से मंत्री नीलकंठ मैदान में है, वही सपा ने छात्र राजनीति से सक्रिय और महामृत्युंजय मंदिर के महंत परिवार के सदस्य कमेश्वरनाथ उर्फ किशन दीक्षित तो चुनावी रणभूमि में उतारा है। लड़की हूँ लड़ सकती हूं नारे के तहत कांग्रेस से महिला प्रत्याशी मशहूर अर्टिटेक्ट मुदिता कपूर चुनाव लड़ रही है। वहीं, अजीत सिंह आम आदमी पार्टी से ताल ठोकें हुए है। 

दक्षिणी विस ने दिया यूपी को मुख्यमंत्री

आजादी के बाद के शुरुआती दौर में कांग्रेस और सीपीआई के बीच इस सीट पर जोरदार मुकाबला रहा है। दो चुनावों (1951 और 1957) में डॉ. संपूर्णानंद के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले सीपीआई के रुस्तम सैटिन को पराजय का समाना करना पड़ा। 1957 में विधायक रहे डॉ. संपूर्णानंद उत्तर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री रह चुके हैं। खास यह कि शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र से डॉ संपूर्णानंद दो बार विधायक चुने गए, लेकिन किसी चुनाव में अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार को नहीं निकले। फिर 1962 में कांग्रेस के गिरधारी लाल ने रुस्तम सैटिन को पराजित किया। इस क्षेत्र से रुस्तम सैटिन को तीन पराजय के बाद 1967 में जीत हासिल हुई। उसके बाद अगले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ के सचिंद्र नाथ बख्शी ने उन्हें मात दी। 1952 के चुनाव से लेकर1967 तक दक्षिणी विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा। विधानसभा चुनाव वर्ष 1969 और 1974 में जनसंघ ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। 1967 में सैटिन ने पहली बार फतह हासिल की। इसके बाद 1980 और 1985 में दो ही मौके आए जब कांग्रेस के कैलाश टंडन और डॉ. रजनी कांत दत्ता चुनाव जीते। इसके बाद से दक्षिणी विधानसभा 1989 से पूरी तरह से बीजेपी का कब्जा हो गया। 

1989 से बीजेपी का कब्जा

दक्षिणी विधानसभा सीट पर वर्ष 1989 से वर्ष 2012 तक लगातार भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहा। सात बार अकेले इस सीट से लेकप्रिय नेता श्यामदेव राय चौधरी 'दादा' चुनाव जीते। लेकिन यूपी की 2017 विधानसभा चुनाव में सात बार के विधायक रहे वरिष्ठ नेता श्यामदेव राय चौधरी का टिकट काटा गया और बीजेपी ने डॉ. नीलकंठ तिवारी को उतारा और नीलकंठ तिवारी ने 92560 मतों के साथ कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद डॉ. राजेश कुमार मिश्रा को हरा के यूपी सरकार में मंत्री बने।

पिछले विस के शहर दक्षिणी का आंकड़ा


स्थान               प्रत्याशी                   पार्टी             वोट          % वोट

1                डॉ. नीलकंठ तिवारी      भाजपा        92560      51.76%

2                राजेश मिश्रा                 कांग्रेस        75334      42.12%

3                राकेश त्रिपाठी              बसपा         5922          3.31%

यह है दक्षिणी विस से मैदान में

  • नीलकंठ तिवारी-भारतीय जनता पार्टी
  • मुदिता कपूर-इंडियन नेशनल कांग्रेस 
  • कामेश्वर नाथ दीक्षित- समाजवादी पार्टी
  • दिनेश-बहुजन समाज पार्टी
  • अजीत- आम आदमी पार्टी
  • अर्पण पाठक-लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)
  • परवेज कादिर खां-इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन
  • बच्चे लाल-बहादुर आदमी पार्टी
  • वीरेंद्र कुमार-आजाद समाज पार्टी (कांशी राम)
  • शिव प्रसाद गुप्ता-राइट टू रिकॉल पार्टी
  • सुभाष चंद्र-राष्ट्रीय भागीदारी पार्टी, 
  • अभिलाषा दीक्षित-निर्दलीय, रेयाजुद्दीन-निर्दलीय 

दक्षिणी विधानसभा के कुल वोटर- 316328

 पुरुष मतदाता 174184

महिला मतदाता 142113

थर्ड जेंडर मतदाता 31