मंगल ध्वनि से संकटमोचन संगीत समारोह का हुआ आगाज, सुर-लय और ताल से झंकृत हुई पहली निशा...

मंगल ध्वनि से संकटमोचन संगीत समारोह का हुआ आगाज, सुर-लय और ताल से झंकृत हुई पहली निशा...

वाराणसी, भदैनी मिरर।कोरोना काल के बीच इस बार भी छह दिवसीय श्री संकट मोचन संगीत समारोह का भव्य आगाज डिजिटल प्लेटफार्म पर शनिवार को हुआ। स्थानीय कलाकारों के साथ देश के अन्य हिस्सों सभी कलाकारों ने हनुमत दरबार में अपनी हाजिरी स्वरांजलि के माध्यम से लगाई। शहनाई की धुन से पहली निशा का शुभारंभ हुआ। पंडित जसराज जी के सुयोग्य शिष्य लोकेश आनंद ने शहनाई के माध्यम से राग जोग में विलंबित लय 'मेरे प्यारे लला, हनुमत लला' से शुरुआत की फिर उसके बाद राग जोग में प्रसिद्ध बंदिश 'सजन मोरे घर आयो' की अवतारणा की।

इसके पश्चात सितारवादन की दूसरी प्रस्तुति के लिए इटावा घराने के प्रसिद्ध कलाकार राम प्रसाद भट्टाचार्य हैदराबाद से जुड़े इन्होंने राज यमन में अल आप जोड़ झाला से प्रारंभ कर अंत में उन्होंने राग यमन में निबद्ध रचना "तुम सुमिरन करत राम नाम, तन में मन में राम नाम" की प्रस्तुति दी। तीसरी प्रस्तुति वंशी वादन की रही। बनारस के लोकप्रिय कलाकार अतुल शंकर वंशी वादन से हनुमत दरबार मे हाजिरी बजाई, उन्हें सुधीर गौतम ने वंशी वादन पर सहयोग प्रदान किया, तबला पर सहयोग पंडित ललित कुमार का रहा। अतुल शंकर ने भजन "श्री राम चंद्र कृपालु भजमन" के माध्यम से अपनी प्रस्तुति को विराम दिया।


चौथी प्रस्तुति के लिए बनारस के प्रसिद्ध कलाकार गणेश प्रसाद मिश्र जुड़े। गायन के माध्यम से उन्होंने हनुमत दरबार में हाज़िरी लगाई, उनको तबला वादन के माध्यम से सिद्धांत मिश्र ने सहयोग प्रदान किया।
पहली निशा की अंतिम प्रस्तुति वायलिन वादन की रही। विख्यात कलाकार पंडित सुखदेव प्रसाद मिश्र ने वायलिन वादन के माध्यम से प्रभु चरणों में शीश नवाया। उन्होंने राग मालकौंस में आलाप जोड़ एवं झाला की पारंपरिक प्रस्तुति दी, उनको तबला वादन के माध्यम से पंडित किशोर कुमार मिश्र ने सहयोग प्रदान किया।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रहे इस कार्यक्रम में तकनीकी विशेषज्ञ अंकित श्रीवास्तव, अनुराग और हर्षित श्याम जायसवाल ने सहयोग कर कलाकारों को मन्दिर से जोड़ा, कार्यक्रम का संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया।


महंत जी ने किया औपचारिक उद्घाटन

श्री संकटमोचन संगीत समारोह का वर्चुअल औपचारिक उद्घाटन करते हुए महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने कहा कि इस अनुष्ठान को पवित्र बनाने के लिए पिछली वर्ष की तरह ही दर्शक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़े। उन्होंने कहा इस वर्ष महामारी ने हमसे ऐसे कलाकारों को छीना है जिसको मंदिर परिवार कभी नहीं भूल पाएगा। पंडित जसराज जी, पंडित राजन मिश्र और देबू चौधरी के परिवार को हनुमान जी महाराज यह कष्ट सहने की शक्ति दे। 

महंत जी ने कहा कि हनुमान जी महराज 'अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता है'। हम सब उनसे प्रार्थना करें इस महामारी से सबको उबारे और सबके प्राणों की रक्षा करें। किसी भी हाल में भगवान की सेवा नहीं रुकनी चाहिए इसलिए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनवरत जारी रहेगा।


आज के कलाकार

  1. वसुंधरा शर्मा (कथक ) वाराणसी
  2. अंकुर मिश्रा ( सितार) वाराणसी
  3.  मंजुसा पाटिल (गायन)  मुम्बई
  4. पारोमिता देशमुख ( गायन)  मुम्बई

नोट- इस सूची में अभी और भी कलाकारों के नाम जुड़ सकते है।