कभी न सोने वाला काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर "मेस"(MASE ) फॉर्मूले से कोरोना को दे रहा मात, IAS नंद किशोर कलाल बता रहे दिल्ली की भी रहती है नजर...

वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने कारण काशी के कोविड कमांड सेण्टर पर दिल्ली की भी नज़र रहती है। वाराणसी मंडल के कमिश्नर दीपक अग्रवाल व जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा कमांड सेण्टर पर रोज़ाना निरिक्षण करते है, रणनीति बनाते है। और जरूरी दिशा निर्देश देते रहते है।"इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" के पास ऑक्सीजन की उपलब्धता, ऱोजाना खपत, आइसोलेशन बेड की संख्या, आईसीयू बेड की उपलब्धता, टीकाकरण का डाटा, संक्रमित मरीजों और ठीक हुए मरीजों की संख्या, मौते, दवा वितरण की संख्या समेत कई तरह की जानकारियां रोज़ के आधार पर उपलब्ध रहती है। इस आधुनिक कंट्रोल रूम में 135 लोग 24 X 7 काम करते है।  

कभी न सोने वाला काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर "मेस"(MASE ) फॉर्मूले से कोरोना को दे रहा मात, IAS नंद किशोर कलाल बता रहे दिल्ली की भी रहती है नजर...

वाराणसी,भदैनी मिरर। "इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" "मेस" (MASE) मॉनिटरिंग , एनालिसिस , स्ट्रेटजी और एक्सीक्यूशन के फॉर्मूले पर काम कर रहा  है, इसका फार्मूला योगी के मूल मंत्र  ट्रेस, टेस्ट और ट्रीट से निकला है। योगी आदित्यनाथ के वारणसी मॉडल    से कोविड पर तेजी से कंट्रोल हो रहा है। कोरोना को काबू करने के लिए कमांड सेण्टर, एक छत के नीचे , रातों दिन काम कर रहा है। और सभी को चिकित्सा सेवा मुहैया करा रहा है। कभी न सोने वाला कंट्रोल रूम आप के साथ हर पल खड़ा है। कमांड सेंटर  सिर्फ फौरी तौर पर ही मदद नहीं करता बल्कि कोरोना को कंट्रोल करने की दीर्घकालीन रणनीति भी बनाता है। जिससे कोरोना के  पाँव पसारने से पहले ही उसके कदम रोका दिए जाते है । इसके लिए स्वास्थ विभाग , प्रशासन और अन्य कई विभाग एक  साथ मिल कर काम कर रहे है। पिछले दिनों यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ "इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" का निरीक्षण भी किये थे और आवश्यक निर्देश दिए थे। वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने कारण काशी के कोविड कमांड सेण्टर पर दिल्ली की भी नज़र रहती है।


इंटीग्रेटेड काशी कोविड कमांड सेण्टर  ऱोजाना हज़ारों लोगों की मदद करता है। लेकिन ये कमांड सेण्टर अपने को इसी काम तक सीमित नहीं किये हुए है । इस कण्ट्रोल रूम की सबसे ख़ास बात ये है की, कोविड को रोकने, फैलने व इलाज़ की रणनीति भी बनाता है। ये योगी के वाराणसी  मॉडल "मेस" (MASE) के फॉर्मूले पर काम करता है। मतलब रोज़ाना आने वाली शिकायत हो या किसी क्षेत्र में बढ़ रहे कोरोना के मरीजों को कैसे कंट्रोल किया जाए, इसकी बहुत ही बारीक़ी से रणनीति भी यहीं कोविड कमांड सेण्टर बनाती है। कोविड मरीजों से सम्बंधित जानकारी जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों से रोज़ना कण्ट्रोल रूम में आती है। जिसे स्वास्थ विभाग के अलावा और कई विभाग के लोग भी संकलित  करते है। मसलन टेस्ट रिपोर्ट, संक्रमित मरीजों की संख्या, ठीक होने वाले मरीजों की संख्या, मौतों की संख्या, टीकारण की संख्या, दवा वितरण, सैनिटाइज़शन, एम्बुलेंस, अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों की संख्या, आइसोलेशन बेड, होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के आंकड़े, जैसे कई प्रकार के डाटा रोज़ के आधार पर कमांड सेण्टर में दर्ज़ होते है  है। "इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" इससे भी आगे बढ़ कर कई आयामों पर काम करता है। इसका एक और अहम काम इसके बाद शुरू होता है। 


"इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" के सह नोडल अधिकारी आईएएस नंद किशोर कलाल जो चिकित्सक भी है। उन्होंने बताया कि कोविड कमांड सेण्टर, कोविड की  सूक्ष्म व बड़े पैमानें पर मॉनिटरिंग करता है। इससे  प्राप्त आकड़ों  का "एनॉलिसिस" यानी  विश्लेषण किया जाता है, मतलब डाटा का सूक्षम परिक्षण होता है । जैसे किन क्षेत्रों में अधिक पॉजिटिव मरीज़ पाए जा रहे है , मौते किस क्षेत्रों में अधिक है। किस इलाको में ऑक्सीजन की डिमांड ज्यादा है। रोज़ की ही रिपोर्ट के आधार पर डाटा एकत्रित किया जाता है। इसके लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रो के स्वास्थ केंद्रों से भी मदद ली जाती है। ग्रामीण इलाको में  क्षेत्र ब्लॉक स्तर  पर विभाजित है। शहरी क्षेत्रो को भी विभाजित किया गया है। जिसके नोडल अधिकारी सब डिविज़नल मजिस्ट्रेट रैंक के अधिकारी है। आकड़ो के मिल जाने से ये पता चल जाता है की, किस क्षेत्रों में किन वस्तओं की कमी है। जिसके चलते संक्रमण दर या कोरोना का  केस बढ़ रहा है। अब शुरू होता है स्ट्रेटजी या रणनीति बनाने  का काम जिसमें विषेशज्ञ और प्रशासन  मिलकर ये तय करतें  है की, किसी विशेष क्षेत्र में कोरोना के बढ़ते मरीजों को कैसे रोका जाए, संक्रमण की चेन को कैसे ब्रेक किया जाए , मरीजों तक जरूरत की सामग्री  जल्दी से जल्दी पहुंचाई जाए ,जैसे दवा, सैनिटाइज़शन,और मरीजों तक उचित चिकित्सकीय सलाह,उन्हें आइसोलेट करना आदि। अब बारी आती है "एक्सीक्यूशन"  की यानी जिस क्षेत्र में कोरोना को कण्ट्रोल करना है। उस क्षेत्र में तेजी से काम करना जिससे संक्रमित मरीजों तक जल्द से जल्द डॉक्टर व दवा पहुंच सके ,जो संक्रमित नहीं हुए है उनको संक्रमण से बचाया जा सके। गंभीर मरीजों के लिए नजदीक में ही  चिकित्सकीय सुविधा मिल सके । सीएम योगी आदित्य नाथ के ट्रेस,टेस्ट और ट्रीट का मंत्र ,वाराणसी मॉडल के तर्ज पर काम करते हुए कोरोना को तेजी से फैलने से रोक लिया है।और तेजी से उपचार पहुंचाने में भी मदद कर रहा है। टीकाकरण में भी मददगार साबित हो रहा है। 
 
वाराणसी मंडल के कमिश्नर दीपक अग्रवाल व जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा कमांड सेण्टर पर रोज़ाना निरिक्षण करते है, रणनीति बनाते है। और जरूरी दिशा निर्देश देते रहते है।"इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" के पास ऑक्सीजन की उपलब्धता, ऱोजाना खपत, आइसोलेशन बेड की संख्या, आईसीयू बेड की उपलब्धता, टीकाकरण का डाटा, संक्रमित मरीजों और ठीक हुए मरीजों की संख्या, मौते, दवा वितरण की संख्या समेत कई तरह की जानकारियां रोज़ के आधार पर उपलब्ध रहती है। इस आधुनिक कंट्रोल रूम में 135 लोग 24 X 7 काम करते है।  

नंद किशोर कलाल ने बताया कि "इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" की "मेस" (MASE) रणनीति का अध्ययन वाराणसी जिले ,शहर और विद्यापीठ ब्लॉक का लेकर किया गया तो 1 मई से 16   मई तक का पॉजिटिव केस का ग्राफ़ तेजी से घटता हुआ दिख रहा है। 

1 मई को जिले में 1849 पॉजिटिव केस थे ,जो 16  मई तक तेजी से घट कर महज़ 303 रह गए, यानी 80 प्रतिशत की कमी आई । इसी तरह वाराणसी सिटी का ग्राफ़ देखा गया तो 718 से घट कर 202  ही पॉजिटिव केस रह गए। शहर में 70 प्रतिशत की कमी आई और  विद्यापीठ ब्लॉक में भी इस रणनीति का ख़ासा असर देखने को मिला इस ब्लॉक में संक्रमण का दर ज्यादा था जो 1 मई को 440 था। जब "इंटीग्रेटेड काशी कोविड रिस्पॉन्स सेंटर" की मैसे  (MASE) रणनीति से काम किया गया तो 16 मई तक तेजी से गिरावट आते हुए 108 केस रह गया। जो 75 प्रतिशत के करीब कमी दर्ज़  की गई।