सेवा, बीमारी और विवाद का भंवर: पद्मश्री डॉ. टी. के. लहरी संग मारपीट का कथित आरोप, कही आंतरिक राजनीति का औजार?
अब तक परिजन डॉक्टर टी के लहरी से मिलने क्यों नहीं आए, आरोप सत्य है तो कैमरे का सामना क्यों नहीं?
भदैनी मिरर (वाराणसी): जिंदगी भर मरीजों की निःस्वार्थ सेवा करने वाले और बीएचयू (BHU) कैंपस के एक साधारण से कमरे में सादगी से जीवन गुजारने वाले मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट पद्मश्री डॉ. टी. के. लहरी इस समय जिंदगी की कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। पिछले कई महीनों से वे बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि, इस बीच अस्पताल में उनके साथ हुई कथित दुर्व्यवहार की खबर ने विश्वविद्यालय और चिकित्सा क्षेत्र में तूल पकड़ लिया है।

क्या है पूरा विवाद?
गत 1 सितंबर को बीएचयू के कुलपति प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी, IMS निदेशक एस. एन. संखवार और चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर पुनीत गुप्ता को एक ई-मेल प्राप्त हुआ। मेल भेजने वाली महिला ने खुद को डॉ. लहरी की भतीजी बताते हुए आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती डॉ. लहरी के साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई है।
इस ईमेल के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय कैंपस और मीडिया जगत में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:

- 84 वर्षीय डॉ. लहरी हमेशा अकेले रहे हैं। ऐसे में अचानक खुद को परिजन बताने वाले लोग सामने कैसे आ गए?
- मारपीट का आरोप आपराधिक प्रकृति का है, तो कथित परिजनों ने स्थानीय पुलिस या जिला प्रशासन से लिखित शिकायत क्यों नहीं की?
- अगर शिकायतकर्ता सच में डॉ. लहरी की भतीजी हैं, तो वे अब तक उन्हें देखने अस्पताल क्यों नहीं पहुंचीं?
- क्या अस्पताल और विश्वविद्यालय प्रशासन की छवि को प्रभावित करने के लिए डॉ. लहरी जैसे सम्मानित व्यक्ति के नाम का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है?
आरोपों के घेरे में आए डॉक्टर का पक्ष
जिन डॉक्टर अरविंद पांडेय पर इलाज के दौरान दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं, उन्होंने अपना रुख स्पष्ट किया है। लिखा - "डॉ. लहरी पिछले 4-5 महीनों से मेरे अधीन भर्ती हैं और मेडिकल बोर्ड की देखरेख में हैं। बिस्तर पर शौच (मल) करने के बाद सफाई प्रक्रिया के दौरान वे मानसिक स्थिति के कारण सहयोग नहीं कर रहे थे और सफाई कर्मचारी तथा मेरे चेहरे पर थूक रहे थे। उन्हें केवल बलपूर्वक (जबरन) रोका गया ताकि उनकी सफाई की प्रक्रिया पूरी की जा सके; थप्पड़ नहीं मारा गया। उन्हें रोकना उस समय एकमात्र विकल्प था। इस पूरी घटना को गलत तरीके से पेश किया गया है ताकि मेरी और संस्थान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जा सके।" — डॉ. अरविंद पांडेय

विश्वविद्यालय और अस्पताल प्रशासन का आधिकारिक बयान
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बीएचयू प्रशासन और सर सुंदरलाल अस्पताल ने स्पष्टीकरण जारी किया है।
चिकित्सा अधीक्षक द्वारा गठित विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम (हृदय रोग, मनोचिकित्सा, न्यूरोलॉजी, क्रिटिकल केयर आदि) की जांच रिपोर्ट के अनुसार:
- डॉ. लहरी 27 जनवरी, 2026 से अस्पताल में भर्ती हैं।
- वे उम्र जनित गंभीर बीमारियों के साथ-साथ सिनाइल डिमेंशिया (Senile Dementia) और व्यवहार संबंधी मानसिक समस्याओं से ग्रसित हैं।
- इसी मानसिक स्थिति के कारण वे अपने दैनिक नित्यकर्म और इलाज में अक्सर असहयोग करते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कथित मारपीट की खबर पूरी तरह तथ्यहीन है। प्रशासन ने डॉ. लहरी के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी देखभाल के लिए सामने नहीं आया। वर्तमान में वे विशेष चिकित्सीय निगरानी में हैं और IMS निदेशक व चिकित्सा अधीक्षक निरंतर उनके स्वास्थ्य का हाल-चाल ले रहे हैं।
धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉ. टी. के. लहरी के प्रति पूरे समाज और विश्वविद्यालय परिवार की गहरी संवेदनाएं हैं। ऐसे समय में जब उन्हें बेहतर स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत है, इस मामले की आड़ में राजनीति करने वालों और भ्रामक खबरें फैलाने वालों की मंशा की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
