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वाराणसी की कला-संस्कृति साधिका डॉ. नेहा सिंह ‘विद्या वारिधि’ मानद उपाधि से अलंकृत

पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ, मथुरा द्वारा हिंदी लेखन, कला-संस्कृति और समाजसेवा में विशिष्ट योगदान पर मिला राष्ट्रीय सम्मान

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भदैनी मिरर, वाराणसी। काशी की प्रख्यात युवा संस्थापिका, कला-संस्कृति साधिका एवं गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर डॉ. नेहा सिंह को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें हिंदी लेखन, कला-संस्कृति तथा समाजसेवा के क्षेत्र में उनके विशिष्ट शोध कार्यों एवं सामाजिक योगदान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ, वृन्दावन धाम (मथुरा) की ओर से प्रतिष्ठित "विद्या वारिधि" सारस्वत सम्मान (मानद उपाधि) से अलंकृत किया गया है। यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके उत्कृष्ट कृतित्व की एक महत्वपूर्ण स्वीकृति है।

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Neha Singh

विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ सम्मान

यह गरिमामयी सम्मान समारोह मुख्य अतिथि, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी के पूर्व कुलपति व पद्मश्री डॉ. अरविन्द कुमार के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता पं. दीनदयाल उपाध्याय हिन्दी विद्यापीठ, मथुरा के कुलपति डॉ. इंदु भूषण मिश्र ने की। इस अवसर पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, गढ़वाल मंडल (उत्तराखंड) के अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र सिंह तोमर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

भारतीय संस्कृति के संरक्षण में अतुलनीय योगदान

मुख्य रूप से आठ पुस्तकों के लेखन के साथ-साथ वैदिक, पौराणिक एवं लोक विषयों पर आधारित उनकी कलाकृतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन में दिए गए विशिष्ट योगदान के लिए डॉ. नेहा सिंह को यह मानद उपाधि प्रदान की गई है। उनकी यह उपलब्धि समूचे वाराणसी और कला जगत के लिए गर्व का विषय है।

 "पुण्यम फाउंडेशन" के जरिए समाजसेवा की मिसाल

वाराणसी में डॉ. नेहा सिंह के नेतृत्व में संचालित ‘पुण्यम फाउंडेशन’ के माध्यम से कला, शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में लगातार सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं। संस्था द्वारा न केवल उभरते हुए कलाकारों को एक सशक्त मंच दिया जा रहा है, बल्कि वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ भित्ति चित्रकला (Mural Painting) का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भरता और नया संबल भी प्रदान किया जा रहा है।समाज के शोषित एवं जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित यह रचनात्मक एवं मानवीय पहल एक संवेदनशील और सृजनात्मक समाज के निर्माण में अहम् भूमिका निभा रही है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है।