वाराणसी: 'मीट की दुकानें ही क्यों, शराब के बार और नॉन-वेज होटल भी शहर से बाहर करो', सपा नेताओं ने DM को सौंपा ज्ञापन
मेयर अशोक तिवारी के फैसले का समाजवादियों ने किया समर्थन, लेकिन कानून में 'समानता' की मांग उठाते हुए शराब दुकानों और आलीशान रेस्टोरेंटों को भी नगर निगम सीमा से बाहर खदेड़ने की उठाई मांग।
वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में मांस और मदिरा की दुकानों को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। वाराणसी नगर निगम के माननीय महापौर (मेयर) द्वारा शहर की स्वच्छता और सुव्यवस्था को बनाए रखने के लिए मांस की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर करने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के बाद अब विपक्ष ने भी सरकार और प्रशासन को घेरते हुए बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


समाजवादी विचारधारा के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर इस निर्णय के संबंध में माननीय जिलाधिकारी (DM) महोदय, वाराणसी को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है।
मेयर के फैसले का समर्थन, लेकिन उठाए गंभीर सवाल
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे समाजवादी नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे शहर की सुव्यवस्था और स्वच्छता के लिए मेयर द्वारा मांस की दुकानों को हटाने के फैसले का पूर्ण समर्थन करते हैं। यह कदम निश्चित रूप से काशी के वातावरण को स्वच्छ और पवित्र बनाने में मददगार साबित होगा। लेकिन, इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन की मंशा और कानून के दोहरे मापदंड पर गंभीर आपत्ति जताई है।

'अमीर और गरीब के लिए अलग कानून क्यों?'
ज्ञापन के माध्यम से सपा नेताओं ने तर्क दिया कि यदि छोटे मांस विक्रेताओं (गरीब दुकानदारों) को हटाकर शहर की व्यवस्था सुधारी जा रही है, तो शहर के बीचों-बीच चल रहे बड़े और आलीशान मांसाहारी (Non-Veg) होटलों और रेस्टोरेंटों पर यह नियम लागू क्यों नहीं हो रहा?

नेताओं का कहना है:
"कानून और व्यवस्था का मापदंड समाज के हर वर्ग, अमीर और गरीब के लिए बिल्कुल समान होना चाहिए। अगर छोटी दुकानें हट रही हैं, तो आलीशान नॉन-वेज रेस्टोरेंट भी शहर के रिहायशी और व्यापारिक क्षेत्रों से बाहर एक निश्चित जोन में शिफ्ट होने चाहिए।"
शराब की दुकानों और बार के कारण बढ़ रहा हुड़दंग
समाजवादी नेताओं ने अपने ज्ञापन में शहर के भीतर संचालित शराब की दुकानों और बार को लेकर भी गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शहर के रिहायशी इलाकों के बीच स्थित देसी-विदेशी शराब के ठेकों और बार के कारण देर रात तक हुड़दंग, महिलाओं से छेड़खानी और तमाम तरह की असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। इससे आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों का घरों से निकलना दूभर हो गया है। एक स्वच्छ और नैतिक माहौल के लिए शराब का शहर के बीच में होना सबसे बड़ा खतरा है।
समाजवादियों ने जिलाधिकारी के सामने रखी ये प्रमुख मांगें:
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समान कार्रवाई: महापौर महोदय के मांस की दुकानों को बाहर करने के निर्णय को तत्काल, निष्पक्ष और कड़ाई से लागू किया जाए।
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शराब और बार पर प्रतिबंध: शहर के भीतर चल रही सभी देसी-विदेशी शराब की दुकानों और बार के लाइसेंस तत्काल निरस्त कर उन्हें नगर निगम की सीमा से बाहर भेजा जाए।
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नॉन-वेज होटलों के लिए अलग ज़ोन: आवासीय और व्यापारिक क्षेत्रों में संचालित सभी नॉन-वेज होटलों व रेस्टोरेंटों को हटाकर शहर के बाहर एक निश्चित 'मांसाहार ज़ोन' में स्थापित किया जाए।
