वाराणसी: खोजवां में नगर निगम की अतिक्रमण कार्रवाई पर फूटा पीड़ितों का गुस्सा; रोते हुए बोले- '75 साल से दे रहे किराया
सरायनंदन रामलीला मैदान में 18 में से सिर्फ 7 दुकानों को मिला नोटिस; पीड़ितों ने भेदभाव का लगाया आरोप, कहा- 'सुनवाई नहीं हुई तो करेंगे चक्का जाम'
वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): वाराणसी के खोजवां (सरायनंदन) क्षेत्र में नगर निगम द्वारा की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को लेकर स्थानीय दुकानदारों और गरीबों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। नगर निगम के राजस्व विभाग द्वारा जारी एक नोटिस के बाद प्रभावित परिवारों ने पूरी कार्रवाई को 'चयनात्मक' (Selective) और भेदभावपूर्ण बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि रसूखदारों के पक्के निर्माण और अवैध टावरों को छूने के बजाय, केवल गरीबों के टिन-शेड और गुमटियों को उजाड़ा जा रहा है।


75 सालों से दे रहे थे किराया, अब कहां जाएं?
ग्राउंड जीरो पर भदैनी मिरर की टीम से बातचीत करते हुए एक पीड़ित महिला ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा:
"आज 75 साल से हमारे पास किराएदारी की रसीद है। हम रामलीला समिति को किराया देते आ रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले ही ₹2000 किराया तय हुआ था, लेकिन अब बाउंड्री वॉल बनाने के नाम पर हमें अचानक हटने को कह दिया गया। कुछ लोग तो अब मनमाना ₹10,000 से ₹15,000 तक मांग रहे हैं। तीन दिन में हम बच्चे लेकर कहां जाएं? कार्रवाई सिर्फ हम जैसे 4-5 गरीबों के खिलाफ ही क्यों हो रही है?"
18 में से सिर्फ 7 दुकानों पर ही तत्काल कार्रवाई क्यों?
स्थानीय पीड़ित बच्चे लाल मोदनवाल ने नगर निगम की इस कार्रवाई को पूरी तरह से 'जबरिया' करार दिया। उन्होंने बताया कि 29 जून को जारी एक लेटर के तहत आराजी संख्या 410 (मौजा सरायनंदन) को सरकारी जमीन बताकर खाली करने को कहा गया है।

बच्चे लाल ने सवाल उठाया, "इस रामलीला मैदान में कुल 18 दुकानें हैं, लेकिन गाज सिर्फ 7 लोगों पर ही क्यों गिराई जा रही है? बाकी 13 दुकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? हमने नगर आयुक्त के पास जाकर अपनी किराएदारी के कागज भी दिखाए, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर कार्रवाई करनी है तो पूरी जमीन की पैमाइश कराकर सब पर समान रूप से की जाए।"

अवैध टावर और नए पक्के निर्माण पर प्रशासन मौन
एक अन्य स्थानीय निवासी राज गुप्ता ने बताया कि इसी अराजी संख्या में कई अवैध निर्माण और अवैध रूप से मोबाइल टावर खड़े हैं, जिन्हें कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद नहीं हटाया गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले एक महीने के भीतर ही रामलीला समिति के लोगों ने नया निर्माण कराकर मोटी रकम वसूली है। सरकारी खंभों और रसूखदारों के पक्के टिन-शेड पर कोई उंगली नहीं उठा रहा है, जबकि गरीबों के पेट पर लात मारी जा रही है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे।
कैमरे के सामने बोलने से कतराए अधिकारी
जब इस पूरे मामले पर भदैनी मिरर की टीम ने मौके पर मौजूद नगर निगम के संबंधित अधिकारियों से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया, तो उन्होंने कैमरे के सामने कोई भी आधिकारिक बयान (बाइट) देने से साफ इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना था कि इस मामले में कोई भी आधिकारिक वक्तव्य केवल नगर निगम मुख्यालय जाकर 'नगर आयुक्त' से ही प्राप्त किया जा सकता है।
निष्पक्षता की गुहार
प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कानून और प्रशासन का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन योगी-मोदी सरकार की 'गरीब कल्याण' की नीति के उलट स्थानीय स्तर पर अधिकारी पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और नगर आयुक्त से मांग की है कि पूरे सरायनंदन मौजा क्षेत्र की निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए और बिना किसी भेदभाव के पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
