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वाराणसी: बनारस बार महामंत्री पर बरसे अधिवक्ता, COP होल्डर को 'फर्जी' बताकर FIR कराने का आरोप; दिया धरना 

महामंत्री  "माफी मांगें और वापस लें मुकदमा", कैंट SHO के खिलाफ भी मोर्चा

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Court News
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वाराणसी (भदैनी मिरर डेस्क): वाराणसी के कचहरी परिसर में बनारस बार एसोसिएशन के महामंत्री सुधांशु मिश्रा और अधिवक्ताओं के एक गुट के बीच विवाद गहरा गया है। एक रजिस्टर्ड (COP होल्डर) अधिवक्ता को 'फर्जी' बताकर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के विरोध में वरिष्ठ अधिवक्ताओं और युवा वकीलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि महामंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग कर एक साथी अधिवक्ता को अपमानित किया है।

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महामंत्री के खिलाफ आक्रोश: "माफी मांगें और वापस लें मुकदमा"

वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव ने कहा कि यह अत्यंत दुखद विषय है कि एक निर्वाचित महामंत्री ने सीओपी (Certificate of Practice) धारक अधिवक्ता को फर्जी बताकर मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने मांग की है कि:

  • महामंत्री सुधांशु मिश्रा सार्वजनिक रूप से अपने कृत्य पर खेद व्यक्त करें।

  • अधिवक्ता योगेन्द्र यादव के खिलाफ दर्ज फर्जी एफआईआर को तत्काल रद्द किया जाए।

  • कैंट थाना प्रभारी (SHO) शिवाकांत मिश्रा के खिलाफ बिना जांच कार्रवाई करने पर एक्शन लिया जाए।

क्या है पूरा मामला? (FIR का आधार)

विवाद की शुरुआत 10 अप्रैल 2026 को कैंट थाने में दर्ज उस तहरीर से हुई, जिसे महामंत्री सुधांशु मिश्रा ने दिया था। तहरीर के मुताबिक:

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  • महामंत्री को शिकायत मिली थी कि योगेन्द्र यादव नामक व्यक्ति अधिवक्ता का वेश धारण कर पुलिस लाइन के पास लोगों से लूट-पाट और अवैध वसूली कर रहा है।

  • आरोप है कि पूछताछ करने पर योगेन्द्र ने महामंत्री को फोन पर धमकी दी।

  • तहरीर में यह भी दावा किया गया कि 9 अप्रैल को 10-15 लोगों ने महामंत्री के चैम्बर में घुसकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी।

अधिवक्ताओं का पलटवार: "यह सीधे तौर पर साजिश"

वहीं, प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का कहना है कि जिस योगेन्द्र यादव को फर्जी बताया जा रहा है, वह कानूनी रूप से रजिस्टर्ड अधिवक्ता है। अनुज यादव ने स्पष्ट किया कि, "महामंत्री जी ने दबाव और प्रभाव में आकर पुलिस के साथ मिलकर यह कार्रवाई की है। हम इस संबंध में डीआईजी से मिलेंगे। यदि एफआईआर रद्द नहीं हुई, तो हम भी जवाबी कार्रवाई करेंगे क्योंकि अपमानित हमारे साथी अधिवक्ता को किया गया है।"

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मुख्य मांगें और भावी रणनीति

प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में न्याय नहीं मिला, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. जवाबदेही: बनारस बार के महामंत्री स्पष्ट करें कि उन्होंने रजिस्टर्ड अधिवक्ता को फर्जी क्यों कहा?

  2. पुलिस की भूमिका: बिना प्राथमिक जांच के SHO कैंट ने साजिश के तहत मुकदमा क्यों लिखा?