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Varanasi: "चरम पर बेरोजगारी, पेपर लीक से युवाओं का भविष्य अधर में", वाराणसी में केंद्र सरकार पर बरसे प्रभारी राजेश पाल गौतम

कचहरी अंबेडकर पार्क में प्रेस वार्ता कर दागे तीखे सवाल; शिक्षा के निजीकरण, एनकाउंटर नीति और 'चंदा चोरी' के आरोपों पर घेरा

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वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): देश में लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और हालिया सरकारी परीक्षा घोटालों को लेकर विपक्षी तेवर लगातार तल्ख होते जा रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को वाराणसी के कचहरी स्थित अंबेडकर पार्क में उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेश पाल गौतम ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़े सवाल उठाए और आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में आम जनता की कमर पूरी तरह टूट चुकी है।

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पेपर लीक और महंगी शिक्षा से छात्र परेशान

प्रेस वार्ता के दौरान राजेश पाल गौतम ने देश की शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने नीट (NEET), जेईई (JEE), यूपीएससी (UPSC), एसएससी (SSC) और आरआरबी (RRB) जैसी पांच प्रमुख परीक्षाओं का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा, "करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण देश के होनहार छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।"

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इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा के निजीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि पढ़ाई को इतना महंगा बना दिया गया है कि यह सामान्य नागरिकों की पहुंच से दूर होती जा रही है। सरकारी स्कूलों को 'मर्जर' (विलय) के नाम पर बंद करने की नीति अपनाई जा रही है, जो बेहद निंदनीय है।

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आस्था का अनादर और किसानों की बदहाली का आरोप

प्रभारी ने सरकार समर्थित ट्रस्टों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मंदिरों के नाम पर चंदा इकट्ठा कर लोगों की आस्था का अपमान किया जा रहा है और इन फंड्स के इस्तेमाल में पारदर्शिता का भारी अभाव है। किसानों और मजदूरों की स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अन्नदाताओं को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, वहीं मनरेगा के तहत मजदूरों को 100 दिन का रोजगार देने का वादा भी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है।

प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था पर उठाए सवाल

देश की कानून-व्यवस्था और न्यायपालिका के प्रति सरकार के रवैये पर उंगली उठाते हुए वक्ता ने कहा कि संवैधानिक संस्थानों को लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल किया, "पुलिस को सीधे एनकाउंटर करने या खुद ही न्याय तय करने का अधिकार किसने दिया? यह पूरी प्रक्रिया केवल और केवल अदालतों के दायरे में होनी चाहिए, लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रख दिया गया है।"

"चंदा चोरी" और संवैधानिक संकट का दावा

सरकार की आर्थिक नीतियों और कार्यशैली पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार न केवल चंदा ले रही है, बल्कि फंड की हेराफेरी भी कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में इन सभी जनविरोधी मुद्दों को लेकर संघर्ष लगातार जारी है। कांग्रेस युवाओं, दलितों, पिछड़ों और देश के सभी शोषित नागरिकों की आवाज को सड़क से संसद तक उठाती रहेगी।

कांग्रेस और वर्तमान शासनकाल की तुलना 

अंत में, राजेश पाल गौतम ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तुलना मौजूदा सरकार से की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में देश के गांव-गांव में स्कूल खोले गए थे और बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए गए थे। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार जनहित के कार्यों को छोड़कर केवल निजीकरण, चंदा वसूली और भ्रष्टाचार पर केंद्रित होकर रह गई है।