वाराणसी: मनीष सिंह हत्याकांड के दो आरोपियों को पुलिस ने बनाया लंगड़ा, पैर में मारी गोली
अंकिता की 'इंसाफ' की पुकार पर पुलिस का बड़ा एक्शन, 50-50 हजार के इनामी तीन आरोपी अब भी फरार
Updated: May 5, 2026, 00:06 IST
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वाराणसी, भदैनी मिरर। फूलपुर थाना क्षेत्र के घमहापुर गांव में एक सप्ताह पूर्व हुई मनीष सिंह की जघन्य हत्या के मामले में वाराणसी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सोमवार देर रात करखियांव इलाके में हुई मुठभेड़ में पुलिस ने 50-50 हजार रुपये के दो इनामी बदमाशों, मनीष राजभर और आशीष राजभर को गिरफ्तार कर लिया है। मुठभेड़ के दौरान बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर भागने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस की गोली दोनों बदमाशों के पैर में लगी है।


एसओजी और फूलपुर पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन
जानकारी के अनुसार, वाराणसी एसओजी प्रभारी गौरव कुमार सिंह और फूलपुर थाना प्रभारी अतुल कुमार सिंह की टीम को बदमाशों के मूवमेंट की सटीक सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने करखियांव इलाके में घेराबंदी की। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने दोनों इनामी बदमाशों को दौड़ाकर गोली मारी, जिससे वे घायल होकर गिर पड़े। उन्हें तत्काल चिकित्सा के लिए अस्पताल भेजा गया है। सूचना मिलते ही मौके पर डीसीपी गोमती/क्राइम आईपीएस नीतू कादयान भी पहुंची।

अंकिता की सिसकियों को मिला मरहम
बीते शनिवार को भदैनी मिरर से खास बातचीत में मनीष सिंह की पत्नी अंकिता ने अपना दर्द साझा किया था। कांपती आवाज और आंखों में आंसू लिए अंकिता ने केवल एक ही मांग की थी— "मेरे पति के हत्यारों का एनकाउंटर हो।" सात दिनों के अंतहीन सन्नाटे और 'मांग का सिंदूर' उजड़ने के गम में डूबी अंकिता की गुहार आखिरकार रंग लाई। पुलिस की इस कार्रवाई को अंकिता की उस 'इंसाफ' की पुकार से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।

क्या था मामला?
एक सप्ताह पूर्व रविवार की रात घमहापुर गांव में एक कार की मामूली टक्कर के बाद मॉब लिंचिंग की खौफनाक वारदात हुई थी। 38 वर्षीय मनीष सिंह की भीड़ ने पीट-पीटकर नृशंस हत्या कर दी थी। पुलिस इस मामले में मनोज प्रजापति, हरिश्चंद्र राजभर, योगेंद्र प्रजापति और अभिषेक को पहले ही जेल भेज चुकी है।
इनकी तलाश जारी
मुठभेड़ में दो इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस की दबिश जारी है। इस मामले के 50-50 हजार के इनामी दीपक राजभर, गोविन्द राजभर और नागेन्द्र राजभर अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
