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वाराणसी: छात्रा से यौन शोषण मामले में ट्यूशन टीचर को 20 साल की सजा, पोक्सो कोर्ट ने लगाया ₹1.53 लाख का जुर्माना

कंप्यूटर सिखाने के बहाने मासूम को बुलाया था घर; 9 गवाहों की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दोषी मुकेश श्रीवास्तव को सजा

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वाराणसी (जैतपुरा) / भदैनी मिरर: गुरु-शिष्य के पवित्र और भरोसेमंद रिश्ते को तार-तार करने वाले एक ट्यूशन टीचर को पॉक्सो एक्सक्लूसिव कोर्ट ने बुधवार को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 12 साल से कम उम्र की मासूम छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पांडेय की अदालत ने ईश्वरगंगी (जैतपुरा) निवासी अभियुक्त मुकेश श्रीवास्तव को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

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अदालत ने दोषी पर ₹1,53,000 का अर्थदंड भी लगाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की कुल राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में प्रदान किया जाएगा।

कंप्यूटर कोर्स कराने के बहाने बुलाया था घर

मामले के अनुसार, पीड़िता आरोपी शिक्षक मुकेश श्रीवास्तव के घर ट्यूशन पढ़ने जाती थी। 22 सितंबर 2024 को जैतपुरा थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में पीड़िता के परिजनों ने आरोप लगाया था कि घटना वाले दिन आरोपी ने कंप्यूटर कोर्स पूरा कराने का झांसा देकर छात्रा को अपने घर बुलाया और कमरे के भीतर उसके साथ यौन अपराध को अंजाम दिया। जैतपुरा पुलिस ने मामले की गहनता से विवेचना की और आरोपी को गिरफ्तार कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।

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9 गवाह, मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य बने अहम कड़ी

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के समक्ष कुल 9 गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान, पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों ने आरोपी का जुर्म साबित करने में अहम भूमिका निभाई।

  • बचाव पक्ष की दलील हुई खारिज: सुनवाई के दौरान अभियुक्त मुकेश श्रीवास्तव ने आरोपों को झूठा बताते हुए दावा किया था कि गणित की किताब न लाने पर उसने छात्रा को डांटा था, जिसके बाद परिजनों ने रंजिश में मारपीट कर फर्जी मुकदमा दर्ज कराया। हालांकि, अदालत के समक्ष बचाव पक्ष की यह दलील टिक नहीं सकी।

अदालत की सख्त टिप्पणी: "गुरु का कृत्य विश्वासघात"

फैसला सुनाते समय पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने गुरु-शिष्य परंपरा और इसके सामाजिक महत्व पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि:

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"शिक्षक विद्यार्थी के जीवन में एक मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका निभाता है। इस रिश्ते की नींव पूर्ण विश्वास पर टिकी होती है। किसी शिक्षक द्वारा अपनी ही मासूम छात्रा के साथ ऐसा अपराध करना समाज और इस पवित्र रिश्ते के साथ गंभीर विश्वासघात है।"