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वाराणसी: मैहर मंदिर के पूर्व प्रधान पुजारी ब्रह्मलीन देवी प्रसाद जी महाराज का अवतरण दिवस आज, कालभैरव और लहरतारा में बंटा प्रसाद व जूस

अनुयायियों ने केक काटकर मनाया पूज्य गुरुदेव का उत्सव; सुप्रसिद्ध भजन गायक विपुल के भजनों पर झूमे श्रद्धालु, 'नर सेवा ही नारायण सेवा' का लिया संकल्प।

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वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में मैहर माता शारदा देवी मंदिर के पूर्व प्रधान पुजारी, परम भजनानंदी, ब्रह्मलीन श्री श्री 108 श्री देवी प्रसाद जी महाराज का पावन अवतरण दिवस उनके अनुयायियों और भक्तों द्वारा अत्यंत श्रद्धा, हर्षोल्लास और सेवा भाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर काशी के कालभैरव और लहरतारा क्षेत्रों में भव्य धार्मिक और सेवा कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

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भीषण गर्मी में राहगीरों को पिलाया ठंडा जूस, लगा भव्य भंडारा

अपने पूज्य गुरुदेव के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में भक्तों ने काशी के कालभैरव और लहरतारा दोनों ही स्थानों पर सबसे पहले केक काटकर उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

इसके बाद गुरुदेव की दी हुई सीख पर चलते हुए भक्तों ने भव्य भंडारे का आयोजन कर लोगों में महाप्रसाद का वितरण किया। साथ ही, भीषण गर्मी और तपिश को देखते हुए कालभैरव मंदिर के समीप अनुयायियों ने विशेष स्टॉल लगाकर राहगीरों, स्थानीय जरूरतमंदों और दूर-दराज से आए दर्शनार्थियों के बीच ठंडे जूस का वितरण कर उन्हें राहत पहुंचाई।

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भजन संध्या: गायक विपुल के सुरीले भजनों पर मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

अवतरण दिवस की इस पवित्र संध्या पर एक भव्य भजन कीर्तन कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध गायक विपुल ने अपनी सुमधुर और जादुई आवाज में एक से बढ़कर एक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर समाँ बांध दिया। भजनों की रसधार में बहकर वहां मौजूद सभी श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने पर मजबूर हो गए।

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'नर सेवा ही नारायण सेवा है', वक्ताओं ने याद किए गुरुदेव के विचार

इस आध्यात्मिक संगोष्ठी और उत्सव के दौरान उपस्थित मुख्य वक्ताओं ने स्वामी जी के दिव्य संदेशों और उनकी पवित्र सीख को याद किया।

  • इंसानियत की सीख: वक्ताओं ने कहा कि गुरु जी हमेशा जातिवाद और धर्मवाद की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत की राह पर चलने की सीख देते थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि 'नर सेवा ही नारायण सेवा है'। न जाने नारायण किस गरीब या जरूरतमंद के रूप में हमारे द्वार पर आ जाएं, इसलिए हमेशा परोपकार के लिए तत्पर रहना चाहिए।

  • भगवान के नाम का बैंक बैलेंस: गुरु जी अक्सर अपने भक्तों को प्रेरणा देते हुए कहते थे कि मनुष्य को अपने तन को सांसारिक जिम्मेदारियों और कर्मों में लगाना चाहिए, लेकिन अपने मन को हमेशा प्रभु के चरणों और नाम सुमिरन में लीन रखना चाहिए। उन्होंने चेताया था कि सांसारिक धन-दौलत और बैंक बैलेंस इसी लोक में छूट जाएगा, लेकिन भगवान के नाम का जो संचित बैलेंस (पुण्य) होगा, वही परलोक में हमारी आत्मा का कल्याण करेगा।

कार्यक्रम में ये प्रमुख जन रहे उपस्थित

इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान और सेवा कार्य में मुख्य रूप से ओम प्रकाश शास्त्री, चंद्रशेखर शास्त्री, विजय गुप्ता, आशीष सिंह, अजीत मिश्रा, विपुल सिंगर और बाबू शिवा दीपक सहित भारी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु, समाज सेवी और गुरु भक्त उपस्थित रहे।