वाराणसी: गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि, टूटा घाटों का संपर्क; बदला दशाश्वमेध की विश्वप्रसिद्ध महाआरती का स्थान
वाराणसी: गंगा का जलस्तर बढ़ने से बदला आरती का स्थान, टूटी घाटों की कड़ियां, DM ने NDRF संग किया निरीक्षण
भदैनी मिरर डेस्क, वाराणसी: वाराणसी में मॉनसून की बारिश के चलते मोक्षदायिनी मां गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नदी के बढ़ते जल प्रवाह के कारण काशी के 84 ऐतिहासिक घाटों का आपसी संपर्क टूट गया है। वहीं, दशाश्वमेध घाट पर जलभराव के चलते विश्वप्रसिद्ध भव्य गंगा आरती का स्थान भी बदलना पड़ा है।


स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने एनडीआरएफ (NDRF) के जवानों के साथ गंगा और वरुणा नदी के तटवर्ती तथा संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों का नौका से निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
चेतावनी बिंदु से 6.70 मीटर नीचे बह रही गंगा
सेंट्रल वाटर कमीशन (CWC) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर 63.56 मीटर दर्ज किया गया है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से लगभग 6.702 मीटर नीचे बना हुआ है।

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वर्तमान जलस्तर: 63.56 मीटर
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चेतावनी बिंदु (Warning Level): 70.262 मीटर
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खतरे का निशान (Danger Level): 71.262 मीटर
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उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level): 73.901 मीटर
15 फीट पीछे खिसका आरती का मंच
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने जानकारी दी कि पिछले दो दिनों से जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे आरती का पारंपरिक मंच जलमग्न हो गया है। इसके चलते आरती को उसके मूल स्थान से 15 फीट पीछे खिसकाकर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे जलस्तर में उतार-चढ़ाव आएगा, परिस्थिति के अनुसार आरती का स्थान समायोजित किया जाता रहेगा।

संस्थापक स्वर्गीय पंडित सत्येंद्र मिश्र को दी भावभीनी श्रद्धांजलि
स्थान परिवर्तन के बीच दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि परिवार द्वारा संस्था के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय पंडित सत्येंद्र मिश्र की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया गया। सुशांत मिश्रा ने बताया कि पंडित सत्येंद्र मिश्र जी के भागीरथ प्रयासों के कारण ही काशी की गंगा आरती आज विश्व पटल पर 'अतुल्य भारत' का प्रतीक बनी है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य का दर्शन करने आते हैं।



