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वाराणसी: करसड़ा में खत्म होगा कूड़े का पहाड़! 25 एकड़ में जापानी तकनीक से बनेगा 'मियावाकी जंगल'

बायोमाइनिंग से समाधान: 12.64 लाख मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी, दुर्गंध से मिलेगी निजात।

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वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को स्वच्छ और सुंदर बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। करसड़ा स्थित कचरे के विशालकाय पहाड़ (Landfill Site) को अब हमेशा के लिए खत्म करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद नगर निगम ने बायोमाइनिंग के जरिए कचरे के निस्तारण की कवायद शुरू कर दी है।

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बायोमाइनिंग से होगा कचरे का अंत

करसड़ा में पिछले एक दशक से लगभग 12.64 लाख मीट्रिक टन कचरा जमा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भयंकर दुर्गंध की समस्या भी बनी हुई है। नगर निगम ने इसके वैज्ञानिक निस्तारण के लिए जापानी तकनीक का सहारा लिया है। GIZ और RPUES जैसी कंपनियों की मदद से मैपिंग का कार्य पूरा हो चुका है और टेंडर प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में करीब डेढ़ साल का समय लगेगा।

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कूड़े के ढेर पर लहलहाएगा 25 एकड़ का मियावाकी वन

नगर निगम की योजना केवल कूड़ा हटाने तक ही सीमित नहीं है। जैसे-जैसे जमीन खाली होगी, वहां जापानी 'मियावाकी तकनीक' का उपयोग कर सघन जंगल विकसित किया जाएगा। यह 25 एकड़ का वन क्षेत्र वाराणसी के लिए 'ग्रीन लंग्स' यानी फेफड़ों की तरह काम करेगा, जिससे शहर की वायु गुणवत्ता (AQI) में सुधार होगा।

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कचरा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था

वाराणसी में प्रतिदिन लगभग 1000 से 1200 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसके प्रबंधन के लिए नगर निगम के पास पहले से ही प्रभावी इंफ्रास्ट्रक्चर है:

  • वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट (करसड़ा): 600 मीट्रिक टन क्षमता।

  • वेस्ट टू चारकोल प्लांट (रमना): 600 मीट्रिक टन क्षमता।

  • C&D प्लांट (रमना): मलबे से ईंट और टाइल्स का निर्माण।

जिम्मेदारों का क्या है कहना?

वाराणसी के नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि कूड़े के पहाड़ का निस्तारण हमारी प्राथमिकता है। वहीं, महापौर अशोक कुमार तिवारी ने इस पहल को वाराणसी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा कि बायोमाइनिंग के बाद विकसित होने वाला मियावाकी वन काशी की सुंदरता में चार चांद लगाएगा।