वाराणसी : बनारस बार के पूर्व महामंत्री ने पीएम-सीएम को पत्र भेजकर मुआवजा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की
अधिवक्ताओं, व्यापारियों और मासूमों की गर्दन रेत रहा प्रतिबंधित मांझा; नित्यानंद राय एडवोकेट ने मौतों का ब्यौरा देकर उठाई ₹1 करोड़ मुआवजे और अफसरों पर एफआईआर की मांग।
वाराणसी (भदैनी मिरर विशेष): धर्मनगरी काशी में प्रतिबंध और अदालती आदेशों के बावजूद खूनी साबित हो रहे 'चाइनीज (नायलॉन/प्लास्टिक) मांझे' की धड़ल्ले से हो रही बिक्री और आए दिन हो रही मौतों को लेकर कानूनी व प्रशासनिक हलकों में आक्रोश गहरा गया है। दी बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद राय (एडवोकेट) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र प्रेषित कर इस पर कड़ा रुख अपनाया है।

अधिवक्ता राय ने अपनी शिकायत में वर्षों से घटी दर्दनाक दुर्घटनाओं और मौतों का विस्तृत ब्यौरा देते हुए जिला व पुलिस प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि इस घातक मांझे की बिक्री रोकने में नाकाम जिम्मेदार अधिकारियों को दंडित किया जाए और मृतकों के परिजनों व घायलों को सरकार की ओर से क्षतिपूर्ति (मुआवजा) दी जाए।
फ्लाईओवरों पर मंडरा रहा मौत का साया: सालों का दर्ज हुआ खूनी रिकॉर्ड
शिकायती पत्र में नित्यानंद राय ने आंकड़ों और खबरों का हवाला देते हुए बताया कि वाराणसी के चौकाघाट, पांडेयपुर और ककरमत्ता फ्लाईओवरों पर लोग दहशत में सफर करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कई चर्चित और दर्दनाक हादसों का जिक्र किया:
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30 अगस्त 2020: स्कूटी से पिता के साथ जा रही मासूम बच्ची कृतिका की चाइनीज मांझे से गर्दन कटने के कारण तड़प-तड़पकर मौत हो गई थी।
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31 दिसंबर 2024: चौकाघाट फ्लाईओवर पर अपनी मां व बहन के साथ बाइक से जा रहे 25 वर्षीय विवेक शर्मा की गर्दन चाइनीज मांझे से रेत गई, जिससे उनकी मौके पर ही तड़पकर मौत हो गई। उसी दिन पैथोलॉजी लैब संचालक सज्जन कुमार और रेस्टोरेंट संचालक प्रतीक अग्रहरी भी गंभीर रूप से घायल हुए।
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अन्य हादसों के शिकार: कटिंग मेमोरियल के शिक्षक विमलेंदू पांडेय, अधिवक्ता श्याम मिलन यादव, व्यापारी नेता राजेश सैंड, सेंट्रल बार के पूर्व उपाध्यक्ष रामकृष्ण पांडेय, और बिजनेसमैन मनीष गुप्ता का बेटा भी इस खूनी मांझे की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच चुके हैं।
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हालिया घटनाएं (2025-2026): अक्टूबर 2025 में शाहजहांपुर के रवि शर्मा और दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर राजमिस्त्री की गर्दन कटने से मौत हुई। वहीं वर्ष 2026 में मंडुवाडीह के सुमित जायसवाल और चौकाघाट पर राकेश गुप्ता (10 अगस्त 2026) गंभीर रूप से घायल हुए।
"प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह फेल, नहीं ली जा रही कोई सीख"
अधिवक्ता नित्यानंद राय ने आरोप लगाया कि NGT और इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्लास्टिक व ग्लास कोटेड मांझे को पूरी तरह प्रतिबंधित किए जाने और शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद पुलिस और प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को गोपनीय सूचनाएं और मोबाइल पर शिकायतें भेजी थीं, लेकिन थाना स्तर की पुलिस द्वारा चाइनीज मांझा बेचने वाले थोक विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई न किए जाने के कारण ही आज बेकसूर लोग सड़कों पर बेमौत मारे जा रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता की प्रमुख मांगें
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प्रभावी एवं धरातलीय रोक: चाइनीज मांझे के निर्माण, स्टोरेज, बिक्री और इस्तेमाल पर जमीनी स्तर पर तत्काल और सख्त से सख्त रोक लगाई जाए।
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जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज: जिस क्षेत्र में चाइनीज मांझे की बिक्री या हादसा हो, वहां के संबंधित थाना प्रभारी और प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उन्हें दंडित किया जाए।
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आर्थिक सहायता और मुआवजा: चाइनीज मांझे से अकाल मृत्यु को प्राप्त होने वाले नागरिकों के परिजनों को ₹1 करोड़ की क्षतिपूर्ति और गंभीर रूप से घायल हुए नागरिकों को समुचित आर्थिक सहायता राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाए।
