Varanasi: श्रेया हत्याकांड में मुख्य आरोपी के पिता रामसेवक चौबे की जमानत अर्जी खारिज, कोर्ट ने ठुकराया दावा
मऊ के साथी पुनीत संग मिलकर विवेक ने दिया था वारदात को अंजाम
भदैनी मिरर (डिजिटल डेस्क) वाराणसी। वाराणसी के बहुचर्चित श्रेया उपाध्याय हत्याकांड मामले में कोर्ट ने मुख्य आरोपी विवेक चौबे के पिता और साजिश में शामिल आरोपी रामसेवक चौबे (राम सहाय चौबे) की जमानत याचिका खारिज कर दी है। द्रुत गामी न्यायालय प्रथम के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज गुप्ता तथा वादी के अधिवक्ता चंद्रशेखर मिश्रा ने की।

क्या है पूरा मामला और हत्या की वजह?
वाराणसी के राजातालाब थाना क्षेत्र के जगतपुर पीजी कॉलेज में एमएससी रसायन विज्ञान की छात्रा 22 वर्षीया श्रेया उपाध्याय अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं और उनके नाम करोड़ों की संपत्ति थी। आरोपी विवेक चौबे (निवासी नियार डीह, चोलापुर) मृतका का दूर का रिश्तेदार था और उसकी संपत्ति के लालच में उस पर बुरी नजर रखता था।
जब श्रेया के परिजनों ने विवेक के रिश्ते को ठुकराकर उनकी शादी गोतमा मकसूदपुर के रहने वाले जय पाठक के बेटे (जो कि एक DRDO अधिकारी हैं) से तय कर दी, जिसकी सगाई नवंबर और विवाह फरवरी में होना तय था तो आरोपी बौखला गया। पुलिस के मुताबिक, विवेक ने अपने पिता रामसेवक चौबे की साजिश और सहमति से मऊ के रहने वाले आर्थिक तंगी से जूझ रहे सुपारी किलर पुनीत मिश्रा को 22 लाख रुपये की सुपारी दी।
मात्र 20 मिनट में दिया था खौफनाक वारदात को अंजाम
18 अगस्त 2026 को सुबह करीब 8:40 बजे जब श्रेया कॉलेज जा रही थीं, तब विवेक ने उन्हें रास्ते में रोका और दबाव बनाकर बच्छांव (रोहनियां क्षेत्र) स्थित अपने किराये के कमरे पर ले गया, जहाँ पुनीत पहले से मौजूद था।
विवेक ने श्रेया के हाथ पकड़े और पुनीत ने धारदार चाकू से गला रेतकर उनकी निर्मम हत्या कर दी। महज 20 मिनट के भीतर वारदात को अंजाम देकर दोनों शव को बाथरूम में बंद कर फरार हो गए।
20 अगस्त 2026 को पुलिस ने बच्छांव पश्चिमपुरा में पानी की टंकी के पास स्थित एक मकान से श्रेया का सड़ा-गला शव बरामद किया था।
अधिक रक्तस्राव बना मौत की वजह
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टर के बयान के अनुसार, मृतका के गले पर गंभीर घाव, पेट पर चोट और शरीर के आंतरिक अंगों पर भी गंभीर प्रहार के निशान पाए गए, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक के कारण मौत होना सामने आया।
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सबसे पहले 24 अगस्त को मुठभेड़ के बाद मुख्य सुपारी किलर पुनीत मिश्रा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद, पिता रामसेवक चौबे (राम सहाय चौबे) को 27 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दलील और न्यायालय का आदेश
अदालत में आरोपी रामसेवक चौबे के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी दाखिल करते हुए खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया और कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। गिरफ्तारी की जगह और समय को लेकर भी सवाल उठाए गए तथा कहा गया कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और क्रूरता को आधार बनाते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। अदालत ने पत्रावली, साक्ष्यों, मृतका के परिजनों के बयानों और अपराध की प्रकृति का बारीकी से अवलोकन करने के बाद आरोपी रामसेवक चौबे का प्रथम जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।
