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वाराणसी: नाटी इमली में 482वां भरत मिलाप 3 अक्टूबर को, राम और भरत के मिलन का साक्षी बनती है काशी 

जाने इतिहास और परम्परा 

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Nati Imali Bharat Milap
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वाराणसी, भदैनी मिरर। नाटी इमली में भरत मिलाप का आयोजन पिछले 481 वर्षों से लगातार हो रहा है। इस वर्ष यह कार्यक्रम 482वां साल मनाया जाएगा। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी बड़ी होती है कि मैदान में तिल रखने तक की जगह नहीं रहती। पांच टन वजन का पुष्पक विमान यादव बंधु द्वारा लाया जाता है, जिसे उठाते समय वातावरण में ठहराव सा महसूस होता है।

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तुलसीदास और यादव बंधु का इतिहास

यादव बंधु का इतिहास संत तुलसीदास के काल से जुड़ा है। तुलसीदास ने गंगा घाट किनारे रहकर रामचरितमानस लिखा, लेकिन इसे जन-जन तक पहुँचाने का बीड़ा मेघाभगत ने उठाया। जाति के अहीर मेघाभगत ने सर्वप्रथम काशी में रामलीला मंचन की शुरुआत की।

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काशी राज परिवार की भागीदारी

पिछले 228 वर्षों से काशी राज परिवार भी इस परंपरा का साक्षी बनता रहा है। पहले काशी नरेश महाराज उदित नारायण सिंह ने 1796 में इस लीला में भाग लिया था और तब से पांच पीढ़ियों से यह परंपरा निभाई जा रही है।
नाटी इमली का भरत मिलाप न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि काशी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी जीवित रखता है।