वाराणसी: अनाहता आर्ट गैलरी में छठ पर्व पर केंद्रित सोलो पेंटिंग एग्जीबिशन 'पावन अरघ' का समापन
तीन दिनों तक चली काशी की इस अनूठी चित्रकला प्रदर्शनी में उमड़े कला प्रेमी; बीएचयू अधिकारियों और गणमान्य अतिथियों ने डॉ. नेहा सिंह की कला-साधना की सराहना की
भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क, वाराणसी: लोक-आस्था के महापर्व 'छठ' की पवित्र परंपराओं और संस्कृति को कैनवास पर उतारने वाली काशी की प्रथम सोलो चित्रकला प्रदर्शनी 'पावन अरघ: एक कला-साधना' का भव्य और गरिमामयी समापन हो गया। अनाहता आर्ट गैलरी में तीन दिनों तक चली इस अनूठी प्रदर्शनी ने शहरवासियों और कला प्रेमियों का मन मोह लिया। समापन समारोह में पहुंचे विशिष्ट अतिथियों ने इस कला-साधना को ऐतिहासिक और लोक-पारंपरिक बताया।

दिग्गज हस्तियों ने की सराहना
समापन समारोह के दौरान काशी की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें मुख्य रूप से बीएचयू के संयुक्त कुलसचिव डॉ. संजय कुमार, बीएचयू जनसंपर्क अधिकारी राजेश सिंह, आई.एम.एस. बीएचयू के काय चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. ओ. पी. सिंह, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) वाराणसी के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अभिजीत दीक्षित, विज्ञान संस्थान बीएचयू के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. कृपा राम, वीडीए बोर्ड के सदस्य श्री अंबरीश सिंह 'भोला', और वैदिक स्कॉलर डॉ. प्रसून चतुर्वेदी शामिल रहे।
सभी अतिथियों ने प्रदर्शनी की संस्थापिका एवं निर्देशिका डॉ. नेहा सिंह के इस अनूठे प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
लोक-परंपराओं को जीवंत रखने का सशक्त माध्यम
गणमान्य अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि लोक-आस्था के महापर्व छठ की एक-एक पारंपरिक विधि को रंगों और तूलिका के माध्यम से कैनवास पर उतारना सनातन संस्कृति के प्रसार की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने माना कि यह प्रदर्शनी हमारी प्राचीन लोक-परंपराओं को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक उनकी मूल भावना व सांस्कृतिक महत्व को पहुँचाने का एक बेहद सशक्त माध्यम साबित हुई है। प्रदर्शनी के सफल समापन पर कला जगत से जुड़े लोगों ने भी डॉ. नेहा सिंह को बधाई दी है।
