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Varanasi: ऑस्ट्रियाई विशेषज्ञों की निगरानी में हो रहा 90 गोंडोला के साथ रोपवे का ट्रायल, 16 घंटे होगा संचालन

सितंबर तक पूरा होगा पहला चरण, कैंट से रथयात्रा तक गोंडोला ट्रायल जारी

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वाराणसी, भदैनी मिरर। देश के पहले अर्बन रोपवे ट्रांसपोर्ट सिस्टम के संचालन की ओर काशी एक बड़ा कदम बढ़ा चुका है। वाराणसी को काशी विश्वनाथ धाम के बाद अब रोपवे सिटी के रूप में नई पहचान मिलने जा रही है। यह देश का पहला शहर होगा, जहां आम नागरिकों के लिए सार्वजनिक परिवहन के तौर पर रोपवे की सुविधा उपलब्ध होगी।
तकनीकी परीक्षण में जुटी ऑस्ट्रियाई टीम
रोपवे के संचालन में सुरक्षा और तकनीकी मजबूती सुनिश्चित करने के लिए ऑस्ट्रिया की लाइटनर कंपनी की इंजीनियरों की टीम वाराणसी में कैंप किए हुए है। 14 जुलाई से शुरू हुए इस तकनीकी परीक्षण में अब तक 10 गोंडोलों का ट्रायल हो चुका है। यह परीक्षण रोपवे के पहले चरण के कैंट स्टेशन से रथयात्रा स्टेशन तक के सेक्शन में किया जा रहा है।
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एक महीने तक चलने वाले इस ट्रायल में कुल 90 गोंडोला अलग-अलग समय पर चलाए जाएंगे। एक बार में तीन-तीन गोंडोला चलाकर उनकी स्पीड, ब्रेकिंग सिस्टम, मोटर, केबल और कंट्रोल यूनिट की बारीकी से जांच की जा रही है। नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों ने जानकारी दी कि यह पूरा ट्रायल रोपवे संचालन की गुणवत्ता और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।
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हर दिन 16 घंटे चलेगा रोपवे
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि रोपवे का संचालन रोजाना 16 घंटे होगा। पहले चरण में तीन स्टेशन बनाए गए हैं- कैंट रोपवे स्टेशन, विद्यापीठ स्टेशन
और रथयात्रा स्टेशन।
वहीं, दूसरे चरण में रथयात्रा से गोदौलिया तक का कार्य तेज़ी से चल रहा है। कार्य पूरा होने के बाद कैंट से गोदौलिया तक का सफर मात्र 16 मिनट में तय किया जा सकेगा।
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यात्रियों के लिए गोंडोला की सुविधा
  1. हर 1.5 से 2 मिनट के अंतराल पर गोंडोला उपलब्ध रहेगा।
  2. एक दिशा में 3000 यात्री प्रति घंटे, दोनों दिशा में 6000 यात्री प्रति घंटे सफर कर सकेंगे।
  3. कुल 148 ट्रॉली कार संचालित की जाएंगी।
  4.  हर ट्रॉली में 10 पैसेंजर सवार हो सकते हैं।
रोपवे संचालन से न केवल शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को राहत मिलेगी बल्कि काशी आने वाले पर्यटकों को एक नई अनुभव आधारित सुविधा भी मिलेगी। पूरा प्रोजेक्ट सितंबर तक पहले चरण के लिए तैयार हो जाएगा।