वाराणसी: UGC कानून व आरक्षण नीति के विरोध में तीसरे दिन भी धरना जारी
मंच पर दौड़ा करंट, दो साथी बीमार; गौतम मिश्रा का गंभीर आरोप—'न सुध ले रही सरकार, न मेडिकल टीम पहुंची; 2027 और 2029 में समाज देगा करारा जवाब।'
वाराणसी (भदैनी मिरर): वाराणसी में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और मौजूदा जातिगत आरक्षण नीति के विरोध में प्रदर्शनकारियों का अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। वरुणा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर, भारी बारिश और मच्छरों के प्रकोप के बावजूद सवर्ण समाज के प्रतिनिधि अपने अधिकारों की मांग को लेकर डटे हुए हैं।


प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गंभीर परिस्थितियों और साथियों के बीमार पड़ने के बावजूद न तो जिला प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही कोई स्वास्थ्य टीम जांच के लिए आई।
मंच पर दौड़ा करंट, बाल-बाल बची जान
धरना स्थल से स्थिति बयां करते हुए गौतम मिश्रा ने बताया कि वरुणा नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है और जलभराव के कारण मंच डूब चुका है। बीती रात मूसलाधार बारिश में मंच के धराशायी होने से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए पूरे मंच पर करंट दौड़ गया, जिससे कार्यकर्ताओं की जान पर बन आई। भगवान की कृपा से सभी बाल-बाल बच गए।

गौतम मिश्रा ने बताया:
"हम पिछले तीन दिनों से इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया के जरिए गुहार लगा रहे हैं। पानी बढ़ रहा है, जहरीले जलजीव और सांप निकल रहे हैं, मच्छर काट रहे हैं। बीती रात बारिश में भीगने और करंट के खतरे के कारण हमारे दो साथी गंभीर रूप से बीमार हो गए। प्रशासन की कोई टीम नहीं आई, तो मजबूरन हमें उन्हें निजी वाहन से पंडित दीनदयाल अस्पताल इलाज के लिए भेजना पड़ा।"
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें:
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UGC कानून में संशोधन/वापसी: यूजीसी के नए नियमों को अनुचित व विभेदकारी बताते हुए उन्हें तुरंत वापस लेने की मांग।
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आर्थिक आधार पर आरक्षण: आरक्षण का आधार जाति न होकर केवल आर्थिक स्थिति होना चाहिए, ताकि हर वर्ग के गरीब और जरूरतमंद को इसका लाभ मिले।
'न पक्ष हमारा, न विपक्ष' — राजनीतिक दलों और प्रशासन को चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधा। राजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से आए बृजेश मिश्रा और गौतम मिश्रा ने कहा कि सवर्ण समाज की बात उठाने के लिए न तो सत्ता पक्ष आगे आ रहा है और न ही विपक्ष।


उन्होंने स्पष्ट किया:
"अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हमने हफ्ते-दर-हफ्ते का आंदोलन का खाका तैयार कर लिया है। अगले हफ्ते से कैंडल मार्च, मशाल जुलूस और आंदोलन का प्रारूप बदला जाएगा। यदि जनप्रतिनिधियों ने हमारी उपेक्षा बंद नहीं की, तो 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में समाज अपनी एकजुटता और ताकत से करारा जवाब देगा।"

