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वाराणसी : बिजली के निजीकरण के खिलाफ फिर बुलंद हुई आवाज, प्रबंध निदेशक कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन 

आंदोलन के एक वर्ष पूरे होने पर बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे कर्मचारी और अधिकारी

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कहा-जिस महाकुम्भ की दुधिया रौशनी की उर्जा मंत्री तारीफ करते नही थकते वह सरकारी कर्मचारियों ने ही किया था

वाराणसी, भदैनी मिरर। बिजली के निजीकरण के खिलाफ विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के बैनर तले बिजलकर्मियों ने गुरूवार को भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश संयोजक ई. शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री अक्सर महाकुंभ की सफलता या उपलब्धि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से बताते रहते हैं। वह महाकुंभ की बिजली निजी कम्पनी के जरिए चलाना चाहते थे। लेकिन महाकुम्भ को चमचमाती दूधिया रोशनी से जगमगानेवाले सरकारी बिजली विभाग के लोग थे। उसी महाकुम्भ की रौशनी की फोटो नासा एजेंसी ने लिया और पूरी दुनिया को दिखाया था। इसके बाद भी ऊर्जा मंत्री बिजलकर्मियों को सम्मानित करने के वजाय निजीकरण का विष पिलाना चाहते हैं। 

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वक्ताओ ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन का एक साल पूरा होने पर आज देशभर के लाखों बिजलीकर्मियों ने सड़कों पर उतर कर निजीकरण और इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का जोरदार विरोध किया। अन्य प्रांतों की राजधानियों और परियोजनाओं पर बिजलीकर्मियों ने विरोध प्रदर्शन कर उप्र में चल रहे बिजली के निजीकरण के निर्णय को निरस्त करने की मांग की। विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे और आगरा में विद्युत अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने किया। राजधानी लखनऊ में मध्यांचल मुख्यालय पर भी विरोध प्रदर्शन किया गया। सभा में बिजलीकर्मियों ने एक साल के सतत संघर्ष के क्रम में संकल्प लिया कि जब तक निजीकरण का निर्णय निरस्त नहीं किया जाता, उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक लगातार आंदोलन जारी रखेंगे।

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संघर्ष समिति ने बताया कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय पावर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा एक वर्ष पूर्व घाटे के गलत आंकड़ों के आधार पर लिया गया था। संघर्ष समिति प्रारंभ से ही यह दावा करती रही है की सब्सिडी और सरकारी विभागों के सरकारी बकाया की धनराशि दे दी जाए तो विद्युत वितरण निगम घाटे में नहीं है। विद्युत नियामक आयोग ने संघर्ष समिति के इस दावे पर यह कहकर मुहर लगा दी है कि 01 अप्रैल 2025 को विद्युत वितरण निगमों के पास 18925 करोड रुपए सरप्लस था। इसी आधार पर बिजली के टैरिफ में वृद्धि नहीं की गई है। घाटे के  झूठे आंकड़े देने के अलावा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजीकरण के लिए बड़े पैमाने पर बिजलीकर्मियों पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां कर रहा है। विगत एक वर्ष में 25000 से अधिक अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदाकर्मियों को आंदोलन के चलते निकाल दिया गया है। फेशियल अटेंडेंस के नाम पर महीनों तक हजारों बिजलीकर्मियों का वेतन रोक कर रखा गया। हजारों बिजलीकर्मचारियों का दूरस्थ स्थानों पर केवल इसलिए ट्रांसफर किया गया कि वे संघर्ष समिति की बैठकों में भाग ले रहे थे। संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों पर डिस्प्रोपोर्सनेट एसेट के मामले में झूठी एफआईआर कराई गई।

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कार्यालय समय के उपरांत पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का बहिष्कार करने वाले 87 विद्युत अभियंताओं  को चार्ज शीट दी गई और उनका प्रमोशन रोक दिया गया है। इसके अलावा मार्च 2023 के आंदोलन के फलस्वरूप बिजलीकर्मियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बावजूद वापस नहीं ली गई है। संघर्ष समिति ने बताया कि बिजलीकर्मियों की रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने की दृष्टि से जबरदस्ती बिजलीकर्मियों और पेंशनरों के घरों पर प्रीपेड मीटर लगाये जा रहे हैं। इन सब यातनाओं के बावजूद बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और इंजीनियर पिछले एक वर्ष से लगातार संघर्षरत है। सभा को ई. शैलेन्द्र दुबे, अजय सिंह, मायाशंकर तिवारी, ओपी सिंह, राजेन्द्र सिंह, पुष्पेन्द्र सिंह, वंदना पाण्डेय, सतीश बिंद, उदयभान दुबे, निखिलेश सिंह, जिउतलाल, राजेश सिंह, गिरीश यादव, जितेन्द्र यादव, रामाशीष सिंह, कृष्णा सिंह, रामकुमार झा, सुनील कुमार, जेपीएन सिंह, सौरभ मिश्रा, निरंजन सिंह, अनिल कुमार, अंकुर पाण्डेय आदि ने संबोधित किया। सभा की अध्यक्षता ई. शैलेंद्र दुबे ने और संचालन अंकुर पाण्डेय ने किया।

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