वाराणसी: NH-233 पर अधूरे ढेरही टोल प्लाजा के खिलाफ हुंकार
पूर्वांचल किसान संगठन ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन; टोल वसूली बंद करने, नो-एंट्री लागू करने और किसानों के मुआवजे की उठाई मांग
वाराणसी (भदैनी मिरर न्यूज़): राष्ट्रीय राजमार्ग-233 (वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग) पर ढेरही (बलरामगंज) में स्थापित टोल प्लाजा को लेकर जनआक्रोश एक बार फिर भड़क उठा है। पूर्वांचल किसान संगठन के बैनर तले किसानों, व्यापारियों और युवाओं ने जिलाधिकारी वाराणसी को ज्ञापन देकर 15 सितंबर 2026 तक कार्रवाई की मांग की है। मांगे पूरी न होने पर संगठन ने 30 सितंबर 2026 को ढेरही टोल प्लाजा पर विशाल धरना-प्रदर्शन करने की खुली चेतावनी दी है।


अधूरी सड़क पर वसूली और मुख्यमंत्री के निर्देशों की अवहेलना
किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने बताया कि ढेरही टोल प्लाजा से महज 2 किलोमीटर आगे सड़क का निर्माण कार्य अधूरा है। इसके अलावा जनपद जौनपुर सीमा में लगभग 16 किलोमीटर का पैच पूरी तरह अधूरा पड़ा है।
संगठन का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि अधूरी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं पर टोल टैक्स न वसूला जाए, इसके बावजूद प्रशासन और टोल कंपनी धड़ल्ले से वसूली कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि टोल कर्मचारी गुंडागर्दी और मारपीट पर उतारू हैं, जिससे आए दिन विवाद और 112 नंबर की पुलिस कॉल की नौबत आ रही है।

2022 से जारी है आंदोलन, फिर भी नहीं निकला समाधान
इससे पहले भी 21 फरवरी 2024, 15 सितंबर 2024 और 23 मार्च 2025 को इस मुद्दे पर बड़े धरना-प्रदर्शन हो चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों (सिटी मजिस्ट्रेट, एसीपी, एनएचएआई अधिकारी और जौनपुर प्रशासन) के स्थलीय निरीक्षण के बाद चोलापुर, केराकत और डोभी क्षेत्र के वाहनों को राहत दी गई थी, लेकिन अब फिर से दबंगई से वसूली शुरू कर दी गई है।


अधूरे मार्ग पर 500 से अधिक हादसे, भारी वाहनों पर "नो एंट्री" की मांग
किसानों का कहना है कि 16 किमी लंबे अधूरे मार्ग पर भारी वाहनों के आवागमन के कारण अब तक 500 से अधिक लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं।
पूर्वांचल किसान संगठन की प्रमुख मांगें:
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टोल बंदी: हाईवे का निर्माण पूरा होने तक ढेरही टोल प्लाजा पर वसूली तत्काल प्रभाव से रोकी जाए।
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नो-एंट्री लागू हो: दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अधूरे मार्ग पर ट्रकों और भारी वाहनों पर "नो एंट्री" लगाई जाए।
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निष्पक्ष जांच और ब्लैकलिस्टिंग: मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों और टोल संचालक कंपनी की जांच कर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
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किसानों का मुआवजा: अधिग्रहित कृषि भूमि का वर्षों से अटका हुआ मुआवजा तत्काल ब्याज सहित जारी किया जाए।
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मुआवजा और आर्थिक मदद: दुर्घटना पीड़ितों और मृतक परिवारों को उचित आर्थिक सहायता दी जाए।
किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने स्पष्ट कहा है कि यदि 15 सितंबर तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 30 सितंबर को हजारों किसान और नागरिक सड़क पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
