वाराणसी में पुलिस टीम पर फायरिंग के दोषियों को 7-7 साल की जेल, 13 साल बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला
लहरतारा ओवरब्रिज पर SP क्राइम की बुलेटप्रूफ जैकेट पर बदमाशों ने दागी थी गोली
वाराणसी: काशी की एक अदालत ने करीब 13 साल पुराने सनसनीखेज मामले में न्याय करते हुए पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने वाले चार अभियुक्तों को जेल की राह दिखा दी है। अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने अमित सिंह उर्फ सोनू, धीरज पाल, सन्नी सोनकर और विशाल को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।


क्या था मामला? (12 नवंबर 2013 की घटना)
अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी ओंकार नाथ तिवारी और विनय कुमार सिंह ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखा। घटना के अनुसार:
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12 नवंबर 2013 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (अपराध) कमलेश दीक्षित अपनी टीम के साथ वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए लहरतारा ओवरब्रिज पर चेकिंग कर रहे थे।
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मुखबिर से सूचना मिली कि लूट और चोरी में शामिल बदमाश तीन बाइकों पर मंडुवाडीह की ओर से आ रहे हैं।
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पुलिस ने जब उन्हें घेरने की कोशिश की, तो बदमाशों ने बाइक छोड़कर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
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इस मुठभेड़ में एक गोली सीधे SP कमलेश दीक्षित की बुलेटप्रूफ जैकेट के बाईं ओर लगी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बची।
अवैध असलहों के साथ 6 हुए थे गिरफ्तार
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घेराबंदी कर मौके से छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनके पास से भारी मात्रा में अवैध असलहा और कारतूस बरामद हुए थे। पुलिस ने जांच पूरी कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।

न्यायालय का फैसला और जुर्माना
अदालत ने चारों अभियुक्तों को दो अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है:
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हत्या का प्रयास (307 IPC): सभी को 7-7 साल की जेल और 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड। जुर्माना न देने पर 3 महीने की अतिरिक्त कैद।
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आर्म्स एक्ट: अवैध असलहा रखने के जुर्म में 2-2 साल की सजा और 3-3 हजार रुपये का जुर्माना।
अन्य आरोपियों का क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान इस केस में शामिल दो अन्य आरोपियों, अरुण उर्फ नखडू और अजय यादव ने पहले ही अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था। इसके बाद कोर्ट ने उनकी फाइल (पत्रावली) अलग कर दी थी। शेष चार अभियुक्तों ने ट्रायल का सामना किया, जिसके बाद आज उन्हें सजा सुनाई गई।

