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वाराणसी पुलिस केस: इलाहाबाद हाईकोर्ट से महिला दरोगा संध्या जायसवाल को बड़ी राहत, पुलिसकर्मियों पर FIR का आदेश निरस्त
 

विशेष SC/ST कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने बताया प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण; न्यायमूर्ति संतोष राय की पीठ ने कहा- लोक सेवकों पर जांच से पहले BNSS की प्रक्रिया का पालन जरूरी

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वाराणसी/इलाहाबाद।  वाराणसी के चोलापुर थाना अंतर्गत मुर्दहा पुलिस चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक (SI) संध्या जायसवाल और अन्य पुलिसकर्मियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने वाराणसी की विशेष SC/ST अदालत के उस आदेश को निरस्त (रद्द) कर दिया है, जिसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच कराने के निर्देश दिए गए थे।
न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने 13 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के आदेश को कानूनी प्रक्रिया के तहत त्रुटिपूर्ण माना।

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हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी: BNSS की प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य


मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संतोष राय की पीठ ने स्पष्ट किया कि लोक सेवकों (सरकारी कर्मचारियों) द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्यों के दौरान किए गए कार्यों पर किसी भी जांच का आदेश देने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है।

 हाईकोर्ट ने पाया कि वाराणसी की विशेष अदालत ने एफआईआर का आदेश जारी करते समय पुलिस रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष जानने जैसी कानूनी अनिवार्यताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। अदालत ने साफ किया कि BNSS की धारा 175(3) और 175(4) के तहत निर्धारित प्रक्रिया की उपेक्षा करके इस प्रकार का सीधे FIR दर्ज कराने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता।


क्या था पूरा मामला?

चोलापुर थाना क्षेत्र के दसनीपुर गांव की निवासी सुशीला देवी ने आरोप लगाया था कि 22 जुलाई 2026 की रात पुलिस टीम उनके घर में जबरन घुसी, परिजनों को जातिसूचक शब्द कहे और उनके बेटे रोहित कुमार गौतम को उठाकर ले गई। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध हिरासत में रखा गया था।
इस मामले में सुशीला देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए वाराणसी की विशेष SC/ST अदालत (विशेष न्यायाधीश सुधाकर राय) ने 2 सितंबर 2026 को पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और स्वतंत्र अधिकारी से 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था।
निचली अदालत के आदेश पर लगा विराम
विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे मामले का पुनरीक्षण किया और पाया कि कानूनी प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद वाराणसी की विशेष अदालत द्वारा दिए गए FIR और जांच के आदेश का प्रभाव समाप्त हो गया है।