वाराणसी: नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के दोषी पिंटू पटेल को 7 साल की कठोर सजा, पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला
कैंट थाना क्षेत्र के 12 साल पुराने मामले में कोर्ट ने 10 गवाहों के बयानों के आधार पर सुनाया फैसला
वाराणसी (भदैनी मिरर): वाराणसी की एक विशेष अदालत ने महिला एवं बाल अपराधों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पांडेय की अदालत ने आरोपी पिंटू पटेल को दोषी पाते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसला आते ही दोषी को तुरंत न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया गया।


12 साल पुराना है पूरा मामला
यह सनसनीखेज मामला करीब 12 साल पुराना यानी साल 2014 का है। कैंट थाना क्षेत्र के ग्राम रमदत्तपुर के रहने वाले पिंटू पटेल पर आरोप था कि उसने कक्षा आठ में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा को बहला-फुसलाकर अगवा किया और उसके साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

घटना के बाद जब पीड़िता के चाचा ने न्याय की आस में अभियुक्त के परिजनों से पूछताछ की, तो उन्हें उल्टा जान से मारने की धमकियां दी गईं। इसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस की शरण ली थी।
10 गवाहों की गवाही और साक्ष्यों ने तय की सजा
मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने अदालत के सामने मजबूती से पीड़िता का पक्ष रखा। पुलिस विवेचना के दौरान आरोपी के परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले थे, जिसके चलते पुलिस ने केवल मुख्य आरोपी पिंटू पटेल के खिलाफ ही न्यायालय में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।

अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान 10 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन किया। साक्ष्यों के आधार पर पिंटू पटेल पर दोष सिद्ध हुआ।
जुर्माने की आधी राशि मिलेगी पीड़िता को
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में संवेदनशीलता दिखाते हुए यह भी निर्देश दिया कि दोषी पिंटू पटेल पर लगाए गए 20 हजार रुपये के जुर्माने की कुल राशि में से 50 प्रतिशत (यानी 10 हजार रुपये) की राशि पीड़ित लड़की को मुआवजे के तौर पर दी जाए। इस फैसले के बाद क्षेत्र में न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।
