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वाराणसी: 'पेंशनर पस्त, सरकार मस्त', 10 सूत्रीय मांगों को लेकर शास्त्री घाट पर पेंशनरों का विशाल धरना; दी चेतावनी

महंगाई राहत और 18 महीने के बकाया एरियर पर सरकार को घेरा: 'विश्व की तीसरी अर्थव्यवस्था फिर हमारा पैसा क्यों रोका?'

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वाराणसी (भदैनी मिरर): अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन (शाखा वाराणसी) के बैनर तले सोमवार को सैकड़ों पेंशनरों ने वरुणा पुल स्थित शास्त्री घाट पर विशाल धरना दिया। कचहरी क्षेत्र में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और साफ शब्दों में कहा कि सरकार उनकी सुध नहीं ले रही है, जिसके कारण उन्हें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा है।

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8वें वेतन आयोग से बाहर रखने की साजिश पर आक्रोश

धरना स्थल पर वक्ताओं ने सरकार द्वारा पिछले वर्ष वित्त विधेयक के माध्यम से पेंशनरी में किए गए बदलावों पर कड़ा ऐतराज जताया। आरोप लगाया गया कि सरकार पुराने पेंशनरों को आठवें वेतन आयोग के दायरे से बाहर करने की साजिश रच रही है। एसोसिएशन ने मांग की है कि पिछले वेतन आयोगों की तर्ज पर ही 8वें वेतन आयोग में भी पुराने पेंशनरों को शामिल करने का आधिकारिक नोटिफिकेशन तत्काल जारी किया जाए।

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'महंगाई चरम पर, राहत सिर्फ 1-2 प्रतिशत'

पेंशनरों ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में घटतौली का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आज महंगाई आसमान छू रही है, लेकिन महंगाई राहत (DR) में महज एक से दो प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा रही है। इसके लिए भी पेंशनरों को बार-बार आंदोलन करना पड़ता है। मांग की गई कि वर्तमान महंगाई के वास्तविक अनुपात में समय पर डी.आर. जारी किया जाए।

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18 महीने का बकाया एरियर और रेल छूट की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कोरोना काल के दौरान फ्रीज किए गए 18 माह के महंगाई भत्ते को रोकने पर भी सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा, "जब देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, तो बुजुर्गों का पैसा रोकने का कोई औचित्य नहीं है।" इसके अलावा, पेंशनरों ने पूर्व की भांति रेल किराए में छूट देने और कैशलेस चिकित्सा सुविधा का दायरा बढ़ाने की भी पुरजोर मांग की।

प्रमुख मांगें एक नजर में:

  • कम्युटेशन कटौती: राशिकरण (Commutation) की कटौती 15 साल के बजाय 10 साल में बंद की जाए।

  • पेंशन वृद्धि: 80 वर्ष की प्रतीक्षा के बजाय, प्रत्येक 5 वर्ष पर 5 प्रतिशत की पेंशन वृद्धि की जाए।

  • मूल पेंशन में विलय: महंगाई राहत 50% से अधिक होने पर उसे मूल पेंशन में जोड़ा जाए।

इन नेताओं ने किया संबोधित

धरने की अध्यक्षता विरेंद्र सिंह और संचालन अशोक सिंह ने किया। आंदोलन को मुख्य रूप से डॉ. श्रीकांत पांडेय, मदनमोहन श्रीवास्तव, सीताराम राकेश सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।