वाराणसी पैनेसिया अस्पताल विवाद: सवा दो साल बाद ₹50 लाख की रंगदारी के लिए काटा जा रहा हंगामा', डायरेक्टर डॉ. पल्लवी मिश्रा का बड़ा पलटवार
बोलीं डॉक्टर मिश्रा - सीएमओ कार्यालय को अस्पताल ने सौंप दिया है पहले ही स्पष्टीकरण, छवि ख़राब करने की हुई कोशिश
अस्पताल प्रशासन का दावा- "सवा दो साल बाद आकर 15-20 लड़कों के साथ की गई नारेबाजी।"
मैनेजर का फोन फ्लाइट मोड पर डालकर ₹50 लाख की मांग करने का लगा आरोप।
वाराणसी,भदैनी मिरर। कबीर नगर-दुर्गाकुंड स्थित पैनेसिया हॉस्पिटल (Panacea Hospital) एक बार फिर सुर्खियों में है। बीते मंगलवार की शाम अस्पताल के बाहर मरीज के परिजनों द्वारा किए गए उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद अब अस्पताल प्रशासन ने कैमरे के सामने आकर अपना पक्ष रखा है। पैनेसिया अस्पताल की डायरेक्टर डॉ. पल्लवी मिश्रा ने भदैनी मिरर से खास बातचीत में प्रदर्शनकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस पूरे हंगामे को अस्पताल पर मेंटल प्रेशर बनाने और ₹50 लाख की 'रंगदारी' वसूलने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।


डॉ. पल्लवी मिश्रा ने क्या कहा? "यह इलाज की शिकायत नहीं, सीधे-सीधे रंगदारी है"
अस्पताल की डायरेक्टर डॉ. पल्लवी मिश्रा ने मामले की पूरी क्रोनोलॉजी समझाते हुए कहा कि यह मामला आज का नहीं बल्कि सवा दो साल पुराना है।
बताया कि- "मार्च 2024 में मंजू सिंह नाम की एक मरीज हमारे यहाँ किडनी स्टोन (पथरी) की शिकायत के साथ वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीत सिंह (MBBS, MS, MCh) के अंडर में एडमिट हुई थीं। उनका ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। डिस्चार्ज के वक्त मरीज और उनके तीमारदारों को स्पष्ट रूप से लिखित और मौखिक तौर पर समझाया गया था कि पेट में एक 'डीजे स्टेंट' (DJ Stent) डाला गया है, जिसे एक महीने बाद आकर निकलवाना अनिवार्य है।"

डॉ. मिश्रा ने आगे बताया कि डिस्चार्ज के एक हफ्ते बाद मरीज के अटेंडेंट चेस्ट की शिकायत लेकर आए और उन्होंने यूरो सर्जन को न दिखाकर मेडिसिन विभाग के डॉ. आशुतोष मिश्रा को दिखाया। डॉ. आशुतोष ने उन्हें भारी डिस्काउंट पर कुछ जांचें लिखीं और दोबारा यूरो सर्जन से मिलने की सलाह दी, जिसे परिजनों ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।

मैनेजर को बुलाकर ₹50 लाख की डिमांड का आरोप
अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि सवा दो साल तक गायब रहने के बाद, करीब 15 दिन पहले मरीज के परिजन अचानक अस्पताल आए और डॉ. विनीत सिंह व अस्पताल को बदनाम करने की धमकी देने लगे। डॉ. पल्लवी ने आरोप लगाया- "हमारे मैनेजर को एक अलग जगह पर बुलाया गया, उनका फोन फ्लाइट मोड पर डलवाया गया और ₹50 लाख की डिमांड की गई। कहा गया कि पैसा दोगे तभी बात बनेगी, नहीं तो मीडिया और आईजीआरएस (IGRS) के जरिए अस्पताल को बदनाम कर देंगे। हमने इस अवैध मांग को ठुकरा दिया और सीएमओ (CMO) ऑफिस में अपना स्पष्टीकरण भी जमा कर दिया है। कल जो कुछ भी बाहर हुआ, वह प्री-प्लान्ड था। 15-20 लड़कों को लाकर अस्पताल का माहौल खराब करने और जबरन पैसे ऐंठने की कोशिश की जा रही है, जिसके आगे अस्पताल प्रशासन बिल्कुल नहीं झुकेगा।"
पीड़ित बेटे का यह था आरोप
दूसरी तरफ, अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रहे मरीज के बेटे शुभम सिंह का पक्ष बिल्कुल अलग और बेहद गंभीर है। शुभम का आरोप है कि अस्पताल ने उनकी माँ की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया है।
शुभम सिंह के अनुसार, 6 मार्च 2024 को उनकी माँ की किडनी की पथरी का ऑपरेशन पैनेसिया अस्पताल में हुआ था। शुभम का आरोप है कि डॉक्टरों ने पेट के अंदर डीजी स्टेंट (DJ Stent) डाल दिया और डिस्चार्ज पेपर या बातचीत में इसका कोई जिक्र नहीं किया। हाल ही में जब उनकी माँ को असहनीय दर्द शुरू हुआ, तो उन्होंने दूसरे वरिष्ठ सर्जन डॉ. नवीन कुमार को दिखाया। वहाँ अल्ट्रासाउंड और जांच में पता चला कि अंदर पुराना स्टेंट पड़ा हुआ है, जिसकी वजह से संक्रमण (Infection) पूरी किडनी और पेट में फैल चुका है।
परिजनों का कहना है कि वे पिछले 15 दिनों से न्याय के लिए सीएमओ (CMO) कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं और 30 मई को लिखित शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा। पीड़ित पक्ष ने अस्पताल को तुरंत सील करने की मांग की है।
