Movie prime
PMC_Hospital

वाराणसी: विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने यूपी सरकार पर लगाया 'पुलिस राज' का आरोप

सीपीएम, कांग्रेस और राजद समेत कई दलों ने जिलाधिकारी के जरिए सौंपा ज्ञापन; कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत निगरानी और गोपनीय डेटा मांगने का पुलिस पर लगाया आरोप।

Ad

 
DS
WhatsApp Group Join Now

Ad

Ad

वाराणसी: धर्मनगरी वाराणसी में प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों और विभिन्न किसान संगठनों ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 'पुलिस राज' और 'निगरानी राज' स्थापित करने का गंभीर आरोप लगाया है। गुरुवार (27 अगस्त 2026) को सीपीएम, सीपीआई, सीपीआई (एमएल), कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और फॉरवर्ड ब्लॉक सहित कई विपक्षी दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से भारत की महामहिम राष्ट्रपति और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।

Ad
Ad

गोपनीयता के अधिकार और निजता के हनन का आरोप

सौंपे गए ज्ञापन में विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग करके वामपंथी, कांग्रेस व अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और किसान आंदोलनकारियों की अवैध व्यक्तिगत निगरानी करवा रही है।

ज्ञापन में विपक्ष द्वारा उठाए गए मुख्य बिंदु:

Ad
  • व्यक्तिगत विवरणों के लिए दबाव: पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं से उनके बैंक खाते, सरकारी पहचान पत्र (जैसे पहचान संख्या/कार्ड), पैन कार्ड, वंश वृक्ष (फैमिली ट्री) और निजी व्यवसाय से जुड़ी जानकारियां देने के लिए अनुचित दबाव बनाया जा रहा है।

  • बिना लिखित आदेश के कार्रवाई: यह सभी व्यक्तिगत और संवेदनशील विवरण मौखिक रूप से मांगे जा रहे हैं, जिसके लिए कोई भी आधिकारिक या लिखित आदेश नहीं दिखाया जा रहा।

  • संवैधानिक अधिकारों का हनन: विपक्षी दलों ने इसे संविधान प्रदत्त निजता (प्राइवेसी) के मौलिक अधिकार का सरेआम उल्लंघन और लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की साजिश करार दिया।

आरएसएस और सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

ज्ञापन में विपक्षी दलों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पारदर्शिता और बिना पंजीकरण के काम कर रहे संगठनों पर सरकार मेहरबान है, जबकि लोकतांत्रिक तरीके से जनता की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया जा रहा है।

Ad

Ad

तत्काल निगरानी रोकने की उठाई मांग

विपक्षी दलों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न और पुलिसिया निगरानी को तुरंत प्रभाव से रोकने की मांग की है।

इस ज्ञापन पर राघवेंद्र चौबे (कांग्रेस), अनिल कुमार सिंह (जिला सचिव, माकपा), वकील अंसारी, मिठाई लाल, एम. के. शर्मा, पुलक त्रिपाठी, राजेश्वर विश्वकर्मा, आशुतोष पांडेय, सतनाम सिंह, हिमांशु सिंह, संतोष चौरसिया, विजय देव और हस्रमेह दी (एआईएफबी) सहित कई वरिष्ठ नेताओं के हस्ताक्षर मौजूद रहे।