Movie prime
PMC_Hospital

Varanasi News: IWAI लाइसेंस नीति के खिलाफ दशाश्वमेध घाट पर निषाद समाज की महाहुंकार, रखीं ये 5 बड़ी मांगें; आंदोलन की चेतावनी

"नगर निगम ही दे लाइसेंस, क्रूज़ और नावों के लिए दोहरा कानून नहीं चलेगा"; नाविकों के उत्पीड़न और लाइफ जैकेट विवाद पर भड़का नाविक समाज

Ad

 
ggg
WhatsApp Group Join Now

Ad

वाराणसी (भदैनी मिरर): धर्मनगरी काशी में गंगा की लहरों पर पीढ़ियों से नौकायन करने वाले पारंपरिक नाविकों के अधिकारों और रोजगार पर आए संकट को लेकर निषाद समाज ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार को दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी के सामने निषाद (नाविक) समाज की एक विशाल महाबैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सराय मोहाना, राजघाट, गायघाट, पंचगंगा, दशाश्वमेध, केदार, अस्सी और मड़वा घाट समेत गंगा किनारे बसे विभिन्न इलाकों के सैकड़ों नाविकों ने हिस्सा लेकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया।

Ad
Ad

महाबैठक का मुख्य एजेंडा 'इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (IWAI) द्वारा नावों के लाइसेंस बनाए जाने की नई प्रस्तावित प्रक्रिया का पुरजोर विरोध करना रहा।

महाबैठक में गूंजी निषाद समाज की ये 5 बड़ी मांगें:

1. IWAI का हस्तक्षेप बंद हो, नगर निगम ही जारी करे लाइसेंस

वक्ताओं ने कहा कि वाराणसी में नावों के संचालन और लाइसेंस का नवीनीकरण परंपरागत रूप से नगर निगम के माध्यम से ही होता आया है। स्थानीय परिस्थितियों को नगर निगम बेहतर समझता है। इसलिए लाइसेंस व्यवस्था में किसी नई बाहरी एजेंसी (IWAI) का हस्तक्षेप कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। नाविकों ने आरोप लगाया कि साल 2023 से नगर निगम ने नए लाइसेंस और नवीनीकरण की प्रक्रिया बंद कर रखी है, जिससे हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

Ad

2. क्रूज़ और छोटी नावों के लिए 'दोहरा कानून' खत्म हो

निषाद समाज ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि गंगा में चल रहे बड़े क्रूज़ जहाजों के लिए नियमों में ढील दी जाती है, जबकि गरीब और छोटे नाविकों पर सुरक्षा नियमों के नाम पर भारी-भरकम चालान और दंडात्मक कार्रवाई की जाती है। यह दोहरा कानून बंद होना चाहिए और नियम सबके लिए समान होने चाहिए।

Ad

3. लाइफ जैकेट विवाद पर नाविकों का उत्पीड़न रुके

नाविकों ने व्यावहारिक समस्या उठाते हुए कहा कि वे हर यात्री को लाइफ जैकेट देते हैं, लेकिन कई पर्यटक बीच सफर में उसे खुद उतार देते हैं या पहनने से मना करते हैं। इसके बावजूद किसी भी जांच या हादसे में सारा दोष नाविक पर मढ़ दिया जाता है। समाज की मांग है कि नियम तोड़ने वाले यात्रियों पर भी जवाबदेही तय हो, न कि सिर्फ नाविकों को बलि का बकरा बनाया जाए।

4. नाविकों पर दर्ज मुकदमे और नाव सीज करने की कार्रवाई पर लगे रोक

बैठक में रोष जताते हुए कहा गया कि छोटी-छोटी बातों और मामूली विवादों को लेकर पुलिस व प्रशासन नाविकों पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर देता है और उनकी नावें सीज कर दी जाती हैं। इस प्रशासनिक उत्पीड़न को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

5. पारंपरिक गोताखोरों को मिले सरकारी रोजगार

गंगा में किसी के डूबने या आपदा के समय निषाद समाज के कुशल गोताखोर अपनी जान जोखिम में डालकर हमेशा प्रशासन की मदद करते हैं। समाज ने मांग की है कि इन अनुभवी और जांबाज गोताखोरों को पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और आपदा प्रबंधन विभागों में स्थाई रोजगार दिया जाए।

मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी

महाबैठक के समापन पर निषाद समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि यह लड़ाई केवल एक कागजी लाइसेंस की नहीं, बल्कि गंगा पुत्रों के सम्मान, रोजगार और उनके वजूद की है। यदि जिला प्रशासन और सरकार ने इन न्यायसंगत मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया, तो पूरा नाविक समाज सड़कों और गंगा की लहरों पर एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगा।