Varanasi News: मंत्री रविंद्र जायसवाल और अधिवक्ता सुनील सिंह आमने-सामने, जमीन कब्जे के आरोपों और FIR पर गरमाई सियासत
दी सेंट्रल बार एसोसिएशन को ज्ञापन सौंपकर की निष्पक्ष जांच की मांग, मंत्री के पीआरओ की तहरीर पर भेलूपुर थाने में दर्ज हुआ है मुकदमा
वाराणसी (भदैनी मिरर)। वाराणसी में उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल और दी सेंट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष सह अधिवक्ता सुनील सिंह के बीच जमीन के एक मामले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अधिवक्ता सुनील सिंह ने बार एसोसिएशन को ज्ञापन सौंपकर अपने ऊपर दर्ज मुकदमे को फर्जी बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं मंत्री पक्ष ने इसे राजनीतिक छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद राजातालाब क्षेत्र के आराजी नंबर 1518, 1519 और 1520 से जुड़ा हुआ है। डॉक्टर श्रवीण कुमार सिंह (प्रोफेसर, हेरिटेज इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) का दावा है कि उन्होंने 2010-11 में राजातालाब में जमीन खरीदी थी। उनका आरोप है कि वर्ष 2013 के बाद से मंत्री रविंद्र जायसवाल ने वहां जमीन लेना शुरू किया और बाद में उनके रास्ते को ब्लॉक कर दिया तथा जबरन बाउंड्रीवाल करवा ली। इस मामले में एसडीएम कोर्ट में भी कार्यवाही चल रही है।
मंत्री के पीआरओ की तरफ से दर्ज कराई गई FIR
मामले में मंत्री रविंद्र जायसवाल के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) जयध्वज श्रीवास्तव ने भेलूपुर थाने में तहरीर दी है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर श्रवीण सिंह और अधिवक्ता सुनील सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356(2) और 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
पीआरओ जयध्वज श्रीवास्तव का कहना है कि डॉक्टर श्रवीण ने बिना रास्ते की जमीन औने-पौने दाम पर खरीदी थी। अब चुनाव और आगामी आयोजनों के करीब मंत्री की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों और डॉक्टर श्रवीण द्वारा सोशल मीडिया पर अनर्गल और तथ्यहीन बयानबाजी की जा रही है।
अधिवक्ता सुनील सिंह और बार एसोसिएशन का पक्ष
फर्जी मुकदमे से आहत अधिवक्ता सुनील सिंह ने सेंट्रल बार एसोसिएशन को दिए ज्ञापन में कहा कि वे अपने मुवक्किल (डॉक्टर श्रवीण) की कानूनी और प्रभावी पैरवी कर रहे थे। इसी रंजिश के चलते मंत्री के इशारे पर उनके खिलाफ भेलूपुर थाने में फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया है ताकि वे दबाव में आकर पैरवी छोड़ दें।
वहीं, अधिवक्ता अनूप सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी नहीं किया गया, तो अधिवक्ता सोमवार से कड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। वकीलों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई तो इसका असर शहर के आगामी कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल विवाद के बाद वाराणसी की राजनीति और कचहरी परिसर में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। सभी की निगाहें अब सोमवार को होने वाली बैठकों और प्रशासनिक रुख पर टिकी हैं।
