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Varanasi News: दहेज हत्या के मामले में पति, सास और ससुर बरी, साक्ष्य के अभाव में वाराणसी कोर्ट का फैसला

विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण) ने सुनाया फैसला; मिर्जामुराद थाने में दर्ज हुआ था केस, कबीरचौरा अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी महिला की मौत

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भदैनी मिरर (वाराणसी कोर्ट डेस्क): वाराणसी की विशेष अदालत (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने दहेज हत्या के एक बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश अमित कुमार तिवारी की अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य और सबूतों के अभाव में आरोपी पति आनंद शर्मा, ससुर मुन्ना शर्मा और सास लक्ष्मी देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक राय और विंध्यांचल सिंह ने प्रभावी पैरवी की।

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क्या था पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत मामले के अनुसार, कमच्छा (थाना भेलूपुर) की रहने वाली सुनीता देवी ने मिर्जामुराद थाने में तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी पुत्री प्रियंका शर्मा की शादी 11 जुलाई 2013 को ठठरा (मिर्जामुराद) निवासी मुन्ना शर्मा के पुत्र आनंद शर्मा के साथ हुई थी।

आरोप लगाया गया था कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले दहेज में टेलीविजन, फ्रिज, कूलर, सोने की अंगूठी और चेन की लगातार मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया।

इलाज के दौरान हुई थी महिला की मौत

वादी पक्ष का आरोप था कि 31 मई 2015 को शाम करीब 5 बजे ससुराल वालों ने प्रियंका को प्रताड़ित कर घर से बाहर निकाल दिया था। घटना की जानकारी मिलने पर मायके वालों ने ससुराल पक्ष से बातचीत करने का प्रयास किया। आरोप के अनुसार, बातचीत के दौरान ही पति आनंद शर्मा, ससुर मुन्ना शर्मा और सास लक्ष्मी देवी ने प्रियंका को कथित रूप से जला दिया।

गंभीर रूप से झुलसी प्रियंका को इलाज के लिए कबीरचौरा स्थित मण्डलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया था। इस संबंध में मिर्जामुराद थाने में संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने साक्ष्य के अभाव में किया बरी

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और पेश किए गए साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन किया। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और उनके खिलाफ कोई ठोस वैज्ञानिक या प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद यह माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध सिद्ध करने में असफल रहा। इसके आधार पर कोर्ट ने पति, सास और ससुर तीनों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश जारी किया।