Varanasi News:अहमदाबाद की बंशी गिर गौशाला और कृषि विभाग के बीच ऐतिहासिक MoU
Natural Farming in Varanasi: वाराणसी मंडल के कमिश्नर और डीएम की मौजूदगी में हुआ समझौता। 100 एकड़ में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट, 'गो कृपा अमृतम्' पद्धति से किसानों की बढ़ेगी आय और सुधरेगा मृदा स्वास्थ्य।
वाराणसी (भदैनी मिरर ब्यूरो): जनपद वाराणसी में प्राकृतिक, टिकाऊ और गो-आधारित कृषि प्रणाली को वैज्ञानिक आधार पर बढ़ावा देने की दिशा में मंगलवार (7 जुलाई) को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। काशी के किसानों को समृद्ध बनाने और धरती की उर्वरा शक्ति को बचाने के लिए बंशी गिर गौशाला (अहमदाबाद, गुजरात), कृषि विभाग वाराणसी और उद्यान विभाग वाराणसी के बीच एक वर्ष की अवधि के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।


यह महत्वपूर्ण समझौता आयुक्त (वाराणसी मंडल) श्री एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी वाराणसी श्री सतेन्द्र कुमार और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) श्री प्रखर कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।
MoU पर मुख्य रूप से उप कृषि निदेशक श्री अमित जायसवाल, जिला उद्यान अधिकारी श्री सुभाष कुमार और बंशी गिर गौशाला के संस्थापक श्री गोपालभाई सुतारिया ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि यह अनूठी पहल मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और किसानों की आय दोगुनी करने में मील का पत्थर साबित होगी।

100 एकड़ में चलेगा पायलट प्रोजेक्ट, 'गो कृपा अमृतम्' का होगा परीक्षण
इस समझौते के तहत वाराणसी जिले में लगभग 100 एकड़ के कृषि क्षेत्रफल में प्रगतिशील किसानों को चुनकर एक साल का पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा।
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वैज्ञानिक पद्धति: इस प्रोजेक्ट में “गो कृपा अमृतम्” आधारित प्राकृतिक एवं गो-आधारित कृषि पद्धति का वैज्ञानिक परीक्षण, प्रदर्शन और सटीक मूल्यांकन किया जाएगा।
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ट्रेनिंग और मॉनिटरिंग: चयनित किसानों को नियमित रूप से तकनीकी मार्गदर्शन, ट्रेनिंग और साप्ताहिक फील्ड मॉनिटरिंग की सुविधा मिलेगी। कृषि विभाग, उद्यान विभाग और बंशी गिर गौशाला के वैज्ञानिक संयुक्त रूप से खेतों का निरीक्षण करेंगे।
किसानों के लिए 'रिस्क सपोर्ट मैकेनिज्म' (जोखिम सहायता) की अनोखी व्यवस्था
किसानों का भरोसा जीतने और उन्हें बिना किसी डर के प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए इस MoU में एक बेहद शानदार प्रावधान किया गया है:

नुकसान की भरपाई करेगी गौशाला: बंशी गिर गौशाला द्वारा प्रारंभिक चरण में चयनित 100 किसानों को प्रति किसान अधिकतम 1 एकड़ क्षेत्र तक जोखिम सहायता (Risk Support Mechanism) दी जाएगी। यदि इस नई पद्धति को अपनाने के कारण किसी किसान की फसल की लाभप्रदता आधार स्तर से कम होती है, तो उस नुकसान की पूरी भरपाई बंशी गिर गौशाला करेगी। इससे सरकारी विभागों या किसानों पर कोई वित्तीय बोझ नहीं आएगा।
कमेटी का होगा गठन, बेहतरीन किसानों का होगा सम्मान
परियोजना को पूरी पारदर्शिता और सुचारू रूप से चलाने के लिए स्टीयरिंग समिति, मॉनिटरिंग समिति एवं कार्यान्वयन समिति का गठन किया जाएगा। इसके अलावा, जो किसान इस प्रोजेक्ट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे, उन्हें सम्मानित किया जाएगा। प्रोजेक्ट के निष्कर्षों के आधार पर संयुक्त रूप से शोध पत्र (Research Papers) और तकनीकी प्रकाशन भी जारी किए जाएंगे।
यह समझौता वाराणसी में आत्मनिर्भर और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत माना जा रहा है।
