Varanasi News: पीएम मोदी के आगमन से पहले गरजे पूर्वांचल के किसान; 11 साल के ब्याज, टोल प्लाजा जांच और शहीद संग्रहालय के लिए सौंपा ज्ञापन
NH-233 मुआवजा ब्याज भुगतान, चंदवक टोल प्लाजा डीपीआर जांच और चोलापुर के 5 शहीदों के लिए भव्य स्मारक निर्माण की उठी आवाज
वाराणसी (भदैनी मिरर): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी वाराणसी दौरे को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ जनसंगठनों की हलचल भी तेज हो गई है। पूर्वांचल किसान संगठन के बैनर तले किसान नेता अजीत सिंह 'डोभी' के नेतृत्व में जिलाधिकारी (DM) वाराणसी को एक ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन में किसानों की ज्वलंत समस्याओं, NH-233 से जुड़े मुद्दों और शहीदों के सम्मान में स्मारक निर्माण हेतु प्रधानमंत्री जी से मुलाकात कराने का अनुरोध किया गया है।

1. चोलापुर के 5 वीर सपूतों के लिए भव्य शहीद संग्रहालय की मांग
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी आगमन के दौरान चोलापुर स्थित पांच वीर सपूतों के शहीद स्मारक पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने का कार्यक्रम शामिल किया जाए। साथ ही, इन शहीदों की स्मृति में उपयुक्त शासकीय भूमि आवंटित कर एक विशालकाय व भव्य शहीद संग्रहालय का निर्माण कराया जाए।
2. NH-233 से जुड़े मुआवजा, ब्याज और टोल वसूली के गंभीर मुद्दे
किसान संगठन ने राष्ट्रीय राजमार्ग 233 (NH-233) से प्रभावित किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है:
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11 वर्षों का लंबित ब्याज: वर्ष 2012 से भूमि अधिग्रहण के मुआवजे पर लगभग 11 वर्षों के बकाया ब्याज का अविलंब भुगतान किया जाए।
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टोल वसूली पर रोक: मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों का अनुपालन करते हुए जब तक सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाता, तब तक टोल वसूली तत्काल स्थगित रखी जाए।
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चंदवक टोल प्लाजा की निष्पक्ष जांच: चंदवक (जौनपुर) स्थित टोल प्लाजा के स्थान परिवर्तन और डीपीआर (DPR) में किए गए बदलावों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
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हादसे के पीड़ितों को मुआवजा: NH-233 पर अब तक हुई सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।
3. पीएम मोदी से प्रतिनिधिमंडल की भेंट की मांग
किसान नेता अजीत सिंह 'डोभी' ने जिलाधिकारी से आग्रह किया है कि पूर्वांचल किसान संगठन के प्रतिनिधिमंडल को प्रधानमंत्री जी से मिलकर किसानों की समस्याओं का मांग पत्र/ज्ञापन व्यक्तिगत रूप से सौंपने के लिए समय उपलब्ध कराया जाए।
किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि शहीदों के बलिदान के सम्मान और देश के अन्नदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इन सभी बिंदुओं पर तत्काल प्रशासनिक और शासकीय स्तर पर कार्रवाई की जानी आवश्यक है।
