Varanasi News: 'ड्राइवर भी हैं देश के सैनिक', वाराणसी में ड्राइवर महासंगठन ने DM को सौंपा ज्ञापन, पेंशन और ₹20 लाख मुआवजे की मांग
चालकों के साथ मारपीट रोकने के लिए विशेष सुरक्षा कानून बनाने और 1 सितंबर को 'ड्राइवर दिवस' घोषित करने की उठाई आवाज।
वाराणसी। सड़कों पर दिन-रात पहिया घुमाकर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनने वाले ड्राइवरों के हक और सुरक्षा के लिए वाराणसी में आवाज बुलंद की गई है। 'UP 65 वाराणसी उत्तर प्रदेश ड्राइवर महासंगठन' के बैनर तले सोमवार को बड़ी संख्या में चालकों ने जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों का एक ज्ञापन सौंपा। संगठन का साफ कहना है कि देश के विकास में योगदान देने वाले ड्राइवरों को 'द्वितीय सैनिक' का दर्जा दिया जाना चाहिए और उनके साथ होने वाले उत्पीड़न पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।


बढ़ती हिंसा और प्रताड़ना पर जताई गहरी चिंता
ड्राइवर महासंगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि अक्सर सड़क दुर्घटनाओं या मामूली विवादों के समय आम जनता और असामाजिक तत्वों द्वारा ड्राइवरों के साथ बेरहमी से मारपीट और मानसिक उत्पीड़न किया जाता है। संगठन ने मांग की है कि ऑन-ड्यूटी चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को तत्काल एक 'विशेष सुरक्षा कानून' (Drivers Protection Act) और कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने चाहिए।

जिलाधिकारी को सौंपी गई 10 सूत्रीय प्रमुख मांगें:
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विशेष सुरक्षा कानून: चालकों के साथ सड़क पर होने वाली मारपीट, लूट और अभद्रता को रोकने के लिए कठोर कानून बने।
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दुर्घटना पर मुआवजा: ऑन-ड्यूटी सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर आश्रितों को 20 लाख रुपये, स्थायी अपंगता पर 10 लाख रुपये और घायल होने की स्थिति में इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक की सरकारी सहायता मिले।
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पेंशन और पेंशन योजना: जीवन के कई साल सड़क पर गुजारने वाले ड्राइवरों को 55 वर्ष की आयु पूरी होने पर सम्मानजनक सरकारी पेंशन दी जाए।
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हाईवे पर सुविधाएं: राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों (Highways) पर भारी वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग और चालकों के लिए सर्वसुविधायुक्त 'ड्राइवर विश्राम गृह' (Rest Rooms) बनाए जाएं।
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सैनिक का दर्जा व सम्मान: देश की सप्लाई चेन को जिंदा रखने वाले ड्राइवरों को 'द्वितीय सैनिक' का मान-सम्मान मिले।
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बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा: ड्राइवरों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए शत-प्रतिशत निःशुल्क पढ़ाई की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाए।
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आवास सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर चालकों को प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए कम से कम 5 लाख रुपये की सहायता दी जाए।
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कमर्शियल लाइसेंस शुल्क में कटौती: भारी वाहन (Heavy Vehicle) लाइसेंस के नवीनीकरण और नए आवेदन शुल्क को कम किया जाए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के युवा भी इस क्षेत्र में रोजगार पा सकें।
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वेतन और सुरक्षा की गारंटी: उत्तर प्रदेश से बाहर काम करने वाले चालकों के समय पर वेतन भुगतान और मालिकों द्वारा किए जाने वाले शोषण के खिलाफ सख्त नियम बनें। वेतन न देने वाले गाड़ी मालिकों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई हो।
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राष्ट्रीय ड्राइवर दिवस: ड्राइवरों के योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल 1 सितंबर को 'ड्राइवर दिवस' घोषित किया जाए।
मांगें पूरी न होने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
ड्राइवर महासंगठन ने अपनी बात रखते हुए दो टूक कहा कि यदि इन जायज और बुनियादी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो संगठन पूरे उत्तर प्रदेश सहित देश स्तर पर चक्का जाम और बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा। वहीं, वाराणसी के जिलाधिकारी ने चालकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए ज्ञापन स्वीकार किया और इस संबंध में उचित व प्रभावी कार्रवाई के लिए आश्वस्त किया।

