वाराणसी न्यूज़: सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाने पर काशी में फूटा गुस्सा, DM को सौंपा ज्ञापन
जंतर-मंतर से दिल्ली पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को हटाए जाने के विरोध में छात्रों और सामाजिक संगठनों ने खोला मोर्चा
वाराणसी (भदैनी मिरर): दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर वाराणसी में भी आक्रोश फैल गया है। वाराणसी और निकटवर्ती क्षेत्रों के छात्रों, नौजवानों, नागरिकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने रविवार (19 जुलाई 2026) को जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार तक अपना विरोध दर्ज कराया। इस संबंध में प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी (DM) वाराणसी को एक ज्ञापन सौंपा है।


सोनम वांगचुक को हटाए जाने का पुरजोर विरोध
ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बीते कल यानी 18 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को गैर-संवैधानिक और अवैध तरीके से अनशन स्थल से हटा दिया गया (जिसे उन्होंने अगवा करने के समान बताया है)।
प्रदर्शनकारियों ने रेखांकित किया कि सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे। वह नीट पेपर लीक धांधली और इसके कारण देश में 13 से अधिक छात्रों द्वारा की गई आत्महत्या की नैतिक जवाबदेही तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

ज्ञापन में कहा गया है: "इस देश के सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन देश के हजारों-हजार छात्रों की मांग की अनदेखी करते हुए सोनम वांगचुक को इस तरह हटाना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि यह सरकार का कायरतापूर्ण कदम है।"
जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन की प्रमुख मांगें
वाराणसी के युवाओं और कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से केंद्र सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से रखी हैं:
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सोनम वांगचुक की वापसी: सोनम वांगचुक को तत्काल रिहा कर उन्हें वापस आंदोलन में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: नीट पेपर लीक घोटाले की जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
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माफियाओं पर एक्शन: प्रतियोगी परीक्षाओं में चल रही निरंतर धांधली पर तत्काल संज्ञान लेते हुए पेपर लीक माफियाओं पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
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समान व मुफ्त शिक्षा: देश के हर नागरिक के लिए एक समान और बिल्कुल निःशुल्क शिक्षा का संवैधानिक प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।
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नीतियों में सुधार: शिक्षा के बढ़ते निजीकरण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ रही फीस और घटती सीटों की समस्या का तुरंत समाधान किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन का दमन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जब तक छात्रों व युवाओं को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।



