Varanasi News: फर्जी WCCB खबरी बनकर 5 लाख ठगे, फंसाने के लिए कमरे में रखे बाघ के नाखून और मॉनिटर लिजर्ड के अंग; STF ने किया गिरोह का भंडाफोड़
पुराने दुर्लभ सिक्कों के नाम पर 5 लाख की ठगी, फंसाने के लिए कमरे में रखे थे मॉनिटर लिजर्ड के अंग और बाघ के नाखून
भदैनी मिरर डेस्क। वाराणसी में एसटीएफ (STF) और वन विभाग की संयुक्त टीम ने एक ऐसे अनोखे और शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो भोले-भाले लोगों को दुर्लभ पुराने सिक्के (एंटीक कॉइन) बेचने के नाम पर ठगता था और पुलिस से बचने के लिए खुद ही फर्जी सूचना देकर पीड़ित को वन्यजीव तस्कर साबित करने की कोशिश करता था।


एसटीएफ फील्ड इकाई वाराणसी और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सारनाथ थाना क्षेत्र के स्वास्तिक होम स्टे से गिरोह के सरगना समेत 3 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 14 अदद मॉनिटर लिजर्ड के अंग, 02 टाइगर (बाघ) के नाखून, 1.58 लाख रुपये नगद और 2 फर्जी वन अधिकारी पहचान पत्र बरामद किए गए हैं।

तस्करी की फर्जी खबर देकर एसटीएफ को बुलाया था होम स्टे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एसटीएफ वाराणसी इकाई के निरीक्षक अनिल कुमार सिंह को वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के माध्यम से सूचना मिली कि प्रभात चतुर्वेदी नामक व्यक्ति ने जानकारी दी है कि सारनाथ क्षेत्र में कुछ लोग मॉनिटर लिजर्ड के अंग और बाघ के नाखून बेचने आए हैं।

सूचना के सत्यापन के लिए एसटीएफ और उपक्षेत्रीय वनाधिकारी राजकुमार गौतम की टीम फरीदपुर अंडरपास पहुंची, जहां मुखबिर प्रभात चतुर्वेदी मिला। उसकी निशानदेही पर स्वास्तिक होम स्टे के कमरे में छापेमारी की गई तो वहां से मॉनिटर लिजर्ड के अंग और बाघ के नाखून बरामद हुए। हालांकि, मौके पर जांच अधिकारी राजकुमार गौतम को बरामद सामान और पूरी कहानी पर शक हुआ।
सख्ती से पूछताछ में खुला ठगी का सनसनीखेज खेल
एसटीएफ टीम ने जब कमरे में मौजूद गिरधारी मौर्या, संजीव कुमार सिंह और पीड़ित नीरज कुमार मौर्या से अलग-अलग पूछताछ की, तो परत-दर-परत पूरा सच सामने आ गया। इसके बाद जब गिरोह के सरगना प्रभात चतुर्वेदी को सख्ती से खंगाला गया, तो उसने पूरी साजिश उगल दी।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
यह गिरोह पहले नकली पुराने सिक्के (एंटीक कॉइन) तैयार करता था। फिर सीधे-साधे लोगों को झांसे में लेकर दावा करते थे कि पुराने सिक्के बेचकर पैसा तुरंत दोगुना हो जाएगा। शिकार को तय जगह पर बुलाने से पहले ही आरोपी कमरे में प्रतिबंधित वन्यजीव (बाघ के नाखून या लिजर्ड के अंग) छुपाकर रख देते थे।
जैसे ही पीड़ित पैसा लेकर पहुंचता था, गिरोह के कुछ सदस्य पैसा लेकर रफूचक्कर हो जाते थे। इसके बाद गिरोह का सरगना खुद WCCB/पुलिस को फोन करके सूचना दे देता था कि 'वन्यजीव तस्कर' आए हैं, ताकि पीड़ित पुलिस केस में उलझ जाए और अपने ठगे गए पैसों की मांग न कर सके।
चोलापुर के युवक से ठगे थे 5 लाख रुपये
हालिया वारदात में इस गिरोह ने चोलापुर के मोहनदासपुर निवासी नीरज कुमार मौर्या को अपने जाल में फंसाया था। नीरज अपने परिचित अभिषेक दुबे से 5 लाख रुपये उधार लेकर होम स्टे पहुंचा था। गिरोह के साथी दीनानाथ और दीपक 5 लाख रुपये लेकर यह कहकर फरार हो गए कि पार्टी सिक्के लेकर आ रही है।
इसके तुरंत बाद प्रभात चतुर्वेदी ने एसटीएफ को वन्यजीव तस्करी की झूठी सूचना देकर छापा पड़वा दिया। लेकिन एसटीएफ की चालाकी से गिरोह का भांडा फूट गया और पुलिस ने प्रभात की निशानदेही पर ठगी के हिस्से में मिले 1,58,000 रुपये नगद भी बरामद कर लिए।
गिरफ्तार आरोपियों में प्रभात चतुर्वेदी (सरगना) निवासी सर्सी, थाना गोहपार, जनपद शहडोल (मध्य प्रदेश), गिरधारी मौर्या निवासी ग्राम मरहठा (कैंपियरगंज) जनपद गोरखपुर और संजीव कुमार सिंह निवासी ग्राम खजौला (मुंडेरवा) जिला बस्ती शामिल है।
इस गैंग में शामिल दीनानाथ यादव (गाजीपुर), दीपक (पटना, बिहार) और संतोष (बिहार) की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
सारनाथ थाने में गंभीर धाराओं में केस दर्ज
मामले में थाना सारनाथ (पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी) पर अभियुक्तों के खिलाफ मु०अ०सं० 418/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2), 338, 336(3) तथा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2, 9, 39, 48, 49, 50, 51 के तहत केस दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
