Varanasi Nagar Nigam: तीन साल में चार गुना बढ़ा राजस्व, 403 करोड़ पार; एकीकृत टैक्स बिल में बना प्रदेश में नंबर-1
गृहकर, जलकर और सीवर कर का एक साथ बिल जारी करने वाला पहला नगर निगम बना वाराणसी; डिजिटल भुगतान से बढ़ी वसूली
वाराणसी। नगर निगम वाराणसी ने राजस्व वसूली के मामले में नया रिकॉर्ड कायम करते हुए इतिहास रच दिया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में जहां निगम की कुल आय 94.36 करोड़ रुपये थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 403.45 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस तरह महज तीन वर्षों में राजस्व में करीब चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है।


संपत्ति कर वसूली में बड़ा उछाल
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में संपत्ति कर वसूली का लक्ष्य 225 करोड़ रुपये रखा गया था, जबकि इसके मुकाबले 267.55 करोड़ रुपये की वसूली की गई। खास बात यह है कि वर्ष 2010 के बाद से गृहकर की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, इसके बावजूद राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डिजिटल इंडिया का बड़ा योगदान
नगर निगम की इस सफलता में डिजिटल भुगतान प्रणाली की अहम भूमिका रही है। जहां वर्ष 2023 में करीब 1.22 लाख करदाता टैक्स जमा कर रहे थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1.82 लाख हो गई है।
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 31 मार्च को ही रिकॉर्ड 7 हजार भवन स्वामियों ने 27 करोड़ रुपये का टैक्स जमा किया, जिसमें 1229 लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से 1.55 करोड़ रुपये का भुगतान किया।

एकीकृत टैक्स सिस्टम से मिली सहूलियत
वाराणसी प्रदेश का पहला ऐसा नगर निगम बन गया है, जिसने गृहकर, जलकर और सीवर कर के लिए एकीकृत बिल की व्यवस्था लागू की है। इससे करदाताओं को बड़ी सुविधा मिली है और वसूली में भी तेजी आई है।
सरचार्ज में दी गई राहत
निगम ने इस वर्ष जलकर और सीवर कर पर 76 करोड़ रुपये का सरचार्ज माफ (छूट) किया, इसके बावजूद राजस्व में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई।
अन्य मदों में भी बढ़ी आय
नगर निगम ने सिर्फ संपत्ति कर ही नहीं, बल्कि अन्य स्रोतों से भी आय में वृद्धि की है—
- सड़क कटिंग से 15.22 करोड़ रुपये
- विज्ञापन से 12.18 करोड़ रुपये
- दुकान किराये से 5.57 करोड़ रुपये
- लाइसेंस शुल्क से 4.49 करोड़ रुपये
यह वृद्धि शहर में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों को भी दर्शाती है।
बकायेदारों पर सख्ती
नगर आयुक्त ने बताया कि जिन भवन स्वामियों ने 31 मार्च तक टैक्स जमा नहीं किया है, उनके बकाया को अब ब्याज सहित अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के बिल में जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही दुकानों के किराए और लाइसेंस शुल्क पर 50% तक विलंब शुल्क भी लगाया जाएगा।
