वाराणसी नगर निगम का बड़ा फैसला: कचरा प्रबंधन के लिए बल्क वेस्ट जनरेटरों का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अनुपालन में नगर निगम ने शुरू की प्रक्रिया; होटलों, अस्पतालों और परिसरों को स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना होगा कचरा, उल्लंघन पर होगी दंडात्मक कार्रवाई।
भदैनी मिरर डिजिटल डेस्क: धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक, आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए नगर निगम ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भारत सरकार) द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के अनुपालन में शहर के सभी बल्क वेस्ट जनरेटर (BWG) के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। नगर निगम ने आधिकारिक रूप से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल चालू कर दिया है।

मंगलवार को सिगरा स्थित डॉ. सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम के सभागार में वाराणसी बृहद कचरा उत्पादकों (बीडब्ल्यूजी) के अभिमुखीकरण और प्रशिक्षण हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में शैक्षणिक संस्थानों, होटलों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

काशी को स्वच्छ बनाना नैतिक जिम्मेदारी: उपसभापति नरसिंह दास
कार्यशाला के मुख्य अतिथि और नगर निगम के उपसभापति नरसिंह दास ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी के ऐतिहासिक अस्सी घाट से स्वयं फावड़ा चलाकर देश को स्वच्छता का संदेश दिया था। ऐसे में काशी को स्वच्छ और सुंदर बनाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सरकार या नगर निगम के भरोसे शत-प्रतिशत स्वच्छता संभव नहीं है, इसमें शहर के संस्थानों और नागरिकों को भी अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।

कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों—इम्पैनल्ड कंसल्टेंट आरसीयूईएस की डॉ. कल्पना अरोड़ा, यूपीपीसीबी (UPPCB) के रीजनल ऑफिसर रोहित सिंह और जीआईजेड इंडिया की सलाहकार एकता गुप्ता ने प्रेजेंटेशन के जरिए कचरा पृथक्करण और प्रसंस्करण की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अंजना झा और धन्यवाद ज्ञापन अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने किया।
कौन कहलाएगा 'बल्क वेस्ट जनरेटर' (BWG)?
नगर निगम के अनुसार, यदि कोई भी संस्थान, परिसर, भवन या व्यावसायिक प्रतिष्ठान निम्नलिखित तीन में से किसी एक मानक को पूरा करता है, तो उसे बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा जाएगा:
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फ्लोर एरिया: 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक का निर्मित क्षेत्र।
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जल की खपत: प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी की खपत।
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कचरा उत्पादन: प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस अपशिष्ट का उत्पादन।
इसके दायरे में बड़े आवासीय परिसर (RWA), होटल, रेस्तरां, अस्पताल, मॉल, बाजार, बैंक्वेट हॉल, शैक्षणिक संस्थान तथा सरकारी व निजी कार्यालय शामिल हैं।
चार श्रेणियों में करना होगा कचरा अलग, CPCB पोर्टल पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन
सभी पात्र संस्थानों को केंद्रीयकृत पोर्टल swm.cpcb.gov.in/register पर चार सरल चरणों में अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। पंजीकरण के बाद कचरे के निष्पादन का नियमित ब्योरा दर्ज करना होगा।
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स्रोत पर अलगाव: कचरे को चार श्रेणियों—गीला (Wet), सूखा (Dry), सैनिटरी (Sanitary) और स्पेशल केयर/हानिकारक (Hazardous) में अलग-अलग करना अनिवार्य है।
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ऑन-साइट कम्पोस्टिंग: बड़े परिसरों को गीले कचरे का निपटान अपने परिसर में ही कम्पोस्टिंग या बायो-मिथेनेशन प्लांट के जरिए करना होगा।
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अधिकृत रीसाइक्लर: सूखे कचरे को केवल पंजीकृत रीसाइक्लर को ही सौंपा जा सकेगा।
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कार्रवाई की चेतावनी: खुले में या खाली प्लॉट में कचरा फेंकने अथवा कचरा जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ भारी जुर्माना और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
