Varanasi MLC Election: स्नातक MLC प्रत्याशी रंजीत यादव का नामांकन खारिज, धरने पर बैठे
बीएचयू से पीएचडी कर रहे निर्दलीय प्रत्याशी रंजीत कुमार यादव का पर्चा रद्द होने पर विवाद; धरने का पांचवां दिन
वाराणसी (भदैनी मिरर): वाराणसी स्नातक एमएलसी (MLC) चुनाव के दौरान उस समय बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल करने वाले रंजीत कुमार यादव (माधव) का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया। नामांकन रद्द होने के विरोध में रंजीत यादव अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए हैं, और उनके इस शांतिपूर्ण अनशन का पांचवां दिन है।

"दस्तावेज सही थे, प्रशासनिक लापरवाही का बनाया गया शिकार"
मीडिया से बातचीत करते हुए रंजीत यादव ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा जमा किए गए सभी दस्तावेज पूरी तरह वैध थे। निर्वाचन नियमों के तहत शपथ दिलाने और उसकी वीडियोग्राफी कराने की जिम्मेदारी रिटर्निंग ऑफिसर की होती है, लेकिन उन्हें शपथ नहीं दिलाई गई और उनके अधिवक्ता को भी अंदर नहीं आने दिया गया। प्रशासन ने भीड़ का हवाला देकर उनका पर्चा खारिज कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि 7 तारीख को नामांकन निरस्त होने के बाद 12-13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन की ओर से नामांकन खारिज होने की कोई आधिकारिक लिखित रिपोर्ट नहीं दी गई है, जबकि अन्य उम्मीदवारों को तुरंत रिपोर्ट मिल गई थी। इस मामले में उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर, चुनाव प्रेक्षक, डीएम, चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री और पीएमओ तक को प्रत्यावेदन भेजा है।
"बढ़ते जनसमर्थन से घबराकर हुई कार्रवाई"
बीएचयू (BHU) से पीएचडी कर रहे और एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले रंजीत यादव का कहना है कि वह पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में लगातार मेहनत कर रहे थे। उनके नामांकन के दौरान उमड़े भारी जनसमर्थन से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था, जिससे घबराकर सत्ता के दबाव और अधिकारियों की मिलीभगत से उनका पर्चा साजिश के तहत खारिज कराया गया है।
न्याय के लिए हाईकोर्ट पहुंचे प्रत्याशी
रंजीत यादव ने स्पष्ट किया कि उन्हें चुनाव आयोग और स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया है और हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और लोकतांत्रिक अधिकार बहाल नहीं होते, तब तक उनका संवैधानिक धरना जारी रहेगा।
