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Varanasi: 'गोंड' आदिवासी समाज के हक पर सामान्य वर्ग का डाका! फर्जी जाति प्रमाणपत्र को लेकर भड़की गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, आंदोलन की चेतावनी

वाराणसी में राज्यपाल और सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन; प्रदेश अध्यक्ष का आरोप- "अधिकारी कर रहे हिलाहवाली"

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वाराणसी (भदैनी मिरर): उत्तर प्रदेश में आदिवासी समाज के हक और अधिकारों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) ने वाराणसी सहित पूर्वांचल के कई जिलों में सामान्य श्रेणी के संपन्न लोगों द्वारा फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रमाण-पत्र बनवाकर सरकारी सुविधाओं और उच्च पदों पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है।

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इस संबंध में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी में महामहिम राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सु सिंह मरावी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आदिवासियों के साथ हो रहा यह अन्याय बंद नहीं हुआ, तो 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।

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 "आदिवासी गोंड की उपजाति 'नायक' और 'ओझा' केवल सोनभद्र के पहाड़ी क्षेत्रों में"

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, वाराणसी और इसके आस-पास के जिलों में पिछले कई वर्षों से अवैध रूप से सामान्य कैटेगरी के लोग खुद को नायक, ओझा और थारू बताकर अनुसूचित जनजाति (ST) का फर्जी प्रमाण-पत्र बनवा रहे हैं।

रोटी-बेटी और संस्कृति बिल्कुल अलग: पार्टी का कहना है कि सामान्य कैटेगरी के लोग आर्थिक रूप से बेहद मजबूत, पूंजीपति और काश्तकार होते हैं, जो महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थ नगर, संतकबीर नगर और मऊ जैसे जिलों में रहते हैं। जबकि, वास्तविक आदिवासी गोंड की उपजाति 'नायक' और 'ओझा' केवल सोनभद्र के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। ये लोग गोंड समाज के पुजारी, बैगा, जड़ी-बूटी और तंत्र-मंत्र के ज्ञाता होते हैं। इनका रहन-सहन, संस्कृति और रोटी-बेटी का संबंध सामान्य वर्ग के लोगों से पूरी तरह भिन्न है।

"शासनादेश के बावजूद राजस्व अधिकारी कर रहे हिलाहवाली"

भदैनी मिरर से बात करते हुए गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुक्कू सिंह  मरावी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा,

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"गोंड जाति के प्रमाण-पत्र की समस्या आज की नहीं है। इसके लिए 2002, 2021 और 2023 में लगातार शासनादेश जारी हुए हैं। नियमों में स्पष्ट है कि अगर टीसी या फसली जैसे दस्तावेज न भी हों, तो मौके पर जाकर मौखिक और सामाजिक जांच कर रिपोर्ट लगानी है। लेकिन तहसील स्तर के राजस्व अधिकारी और कर्मचारी लगातार हिलाहवाली कर रहे हैं और प्रमाण-पत्र बनाने से मना कर देते हैं।"

मरावी ने आगे दर्द बयां करते हुए कहा कि पूर्व में आंगनवाड़ी के 1,210 पदों के लिए भी आंदोलन किया गया था, लेकिन जनजाति समुदाय के लिए एक भी सीट आवंटित नहीं की गई, जिससे युवाओं में भारी आक्रोश है।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की मुख्य मांगें:

  1. शासनादेश का कड़ाई से पालन हो: भारत के राजपत्र संविधान आदेश संशोधन अधिनियम-2002 और उत्तर प्रदेश शासनादेश (दिनांक 03-11-2021) का कड़ाई से अनुपालन कराते हुए गोंड जाति का प्रमाण-पत्र सुगमतापूर्वक जारी किया जाए। इस आदेश का उल्लंघन करने वाले लापरवाह राजस्व अधिकारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

  2. फर्जी प्रमाणपत्रों की उच्चस्तरीय जांच हो: महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थ नगर, संतकबीर नगर, मऊ आदि जिलों में रहने वाले सामान्य वर्ग के जिन लोगों ने 'नायक' या 'ओझा' (ब्राह्मण वर्ग) बनकर ST का लाभ लिया है, उनकी संस्कृति, रीति-रिवाज और रोटी-बेटी के सामाजिक संबंधों की गहन जांच की जाए और उनके प्रमाण-पत्र निरस्त कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन का शंखनाद

प्रदेश अध्यक्ष सुक्कू सिंह मरावी ने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया, तो पूरा आदिवासी समाज सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगा। उन्होंने एलान किया कि आगामी 9 अगस्त (विश्व आदिवासी दिवस) को पार्टी के बैनर तले हजारों आदिवासी लखनऊ कूच करेंगे और माननीय मुख्यमंत्री का घेराव करेंगे।