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वाराणसी: 'आश्रम और आवास नहीं मिला तो डीएम दफ्तर के बाहर करेंगे आमरण अनशन', सलमा किन्नर ने प्रशासन को दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी हक से वंचित है ट्रांसजेंडर समुदाय, वीडीए आवास में 2% आरक्षण ‘हड़पने’ का आरोप; डीएम पर भड़कीं सलमा किन्नर।

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वाराणसी, भदैनी मिरर। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में ट्रांसजेंडर (किन्नर) समुदाय ने अपने अधिकारों और सुरक्षित आवास की मांग को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। 'दीक्षा महिला कल्याण शोध संस्थान' की सहयोगी और ट्रांसजेंडर राइट्स एक्टिविस्ट सलमा किन्नर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी (डीएम) वाराणसी को एक कड़ा प्रार्थना-पत्र सौंपा है।

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इस पत्रक के जरिए प्रशासन को साफ चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर वाराणसी में "किन्नर आश्रम" की स्थापना और आवास आवंटन को लेकर कोई ठोस लिखित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिलाधिकारी कार्यालय या प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान पर "अनिश्चितकालीन आमरण अनशन" पर बैठने को विवश होंगे।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी अनदेखी


भदैनी मिरर के संवाददाता से बातचीत (बाइट) के दौरान सलमा किन्नर का दर्द और आक्रोश साफ छलक पड़ा। उन्होंने बताया, "आज हम लोगों ने डीएम साहब को पत्रक दिया है, और ऐसे हजार पत्रक हम पहले भी दे चुके हैं। हम लगातार मांग कर रहे हैं कि हमारे लिए कोई बंजर जमीन अलॉट की जाए ताकि हम वहां अपना आश्रम बनवा सकें, या फिर काशीराम आवास अथवा वीडीए (Varanasi Development Authority) के प्रोजेक्ट्स में हमें सेंटर होम दिया जाए।"

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सलमा किन्नर ने वीडीए के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) के आवासों में हमारा 2 प्रतिशत का आरक्षण था, जिसके तहत करीब 12 प्लॉट हमारे बन रहे थे। लेकिन वीडीए के अधिकारी हमारा यह अधिकार खा गए। प्रधानमंत्री आवास और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं में भी हमें आरक्षण मिला था, मगर यहां के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।"


"गवर्नर के फोन के बाद भी 6 महीने से टालमटोल कर रहे हैं डीएम"

प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज किन्नर समाज ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल (गवर्नर) से भी मिल चुके हैं। सलमा किन्नर के अनुसार, "गवर्नर साहब ने खुद यहां के डीएम को फोन करके हमारे मामले को देखने को कहा था, मगर डीएम साहब पिछले 6 महीने से हमें सिर्फ टरका रहे हैं। कभी कहते हैं आज आओ, कभी कहते हैं कल आओ। कभी नगर निगम से लिस्ट मांगते हैं तो कभी ग्रामीण विकास से। वाराणसी में इतने सरकारी भवन खाली पड़े हैं, उन्हीं में से कोई एक हमें दे दें।"

किराए पर कमरा नहीं मिलता, परिवार ने भी छोड़ा


अपनी सामाजिक और आर्थिक पीड़ा को बयां करते हुए सलमा किन्नर ने कहा कि समाज आज भी उन्हें अपनाने को तैयार नहीं है। कोई भी मकान मालिक उन्हें कमरे पर रेंट (किराया) नहीं देना चाहता। महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि बिना किसी फायदे के कोई ₹10 भी मदद नहीं करता। परिवार हमें अपनी संपत्ति से बेदखल कर देता है और घर से भगा देता है।

उन्होंने तीखे सवाल उठाते हुए कहा, "भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय को इतने अधिकार और नियम दिए हैं, फिर भी स्थानीय प्रशासन हमारे लिए कुछ क्यों नहीं कर रहा? जो आरक्षण पुरुष और महिला को प्राप्त है, उतना ही अधिकार हमें भी है। फिर हमें क्यों पिछड़ा समझकर मुख्यधारा से वंचित किया जा रहा है? क्या बनारस के किसी भी विभाग में कोई ट्रांसजेंडर नौकरी कर रहा है, जबकि इतने पद खाली पड़े हैं?"


अधिकारियों का सम्मान करते हैं, लेकिन अब आंदोलन ही रास्ता


सलमा किन्नर ने बताया कि वे अधिकारियों का पूरा सम्मान करती हैं और इसीलिए प्रशासन के निर्देशानुसार केवल 8-10 की सीमित संख्या में ही अपनी बात रखने शांतिपूर्वक आए थे। मौके पर मौजूद मातहत अधिकारियों से हुई बातचीत में उन्होंने चांदमारी स्थित वीडीए आवास में अपने 2% आरक्षण की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया, जिसे अधिकारियों ने जिलाधिकारी तक भेजने का आश्वासन दिया है।

किन्नर समाज ने साफ कर दिया है कि यदि इस बार भी उनके साथ न्याय नहीं हुआ, तो वे अपनी जान की बाजी लगाने से पीछे नहीं हटेंगे और किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी वाराणसी जिला प्रशासन की होगी।