वाराणसी: प्रधानमंत्री की अपील के विरोध में स्वर्णकारों का अनोखा प्रदर्शन, बेची झालमूरी
गिरते स्वर्ण व्यापार और कारीगरों की बदहाली पर जताया आक्रोश; आभूषण के औजार छोड़ हाथों में थामे झालमूरी के डिब्बे
वाराणसी
प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील के बाद धर्मनगरी वाराणसी के स्वर्णकार समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस अपील के विरोध में आज जिला मुख्यालय पर स्वर्णकारों ने एक बेहद अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। शुभम सेठ “गोलू” के नेतृत्व में जुटे सैकड़ों व्यापारियों और कारीगरों ने अपने आभूषण बनाने के पारंपरिक औजारों को एक तरफ रख दिया और सड़कों पर 'झालमूरी' बेचकर अपना विरोध दर्ज कराया।


पुश्तैनी हुनर छोड़ 'झालमूरी' बेचने को मजबूर
इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य सरकार का ध्यान स्वर्ण व्यापार में आ रही भारी गिरावट और खाली होती दुकानों की ओर खींचना था। विरोध स्वरूप शुभम सेठ “गोलू” ने खुद अपने हाथों से झालमूरी बनाकर लोगों को खिलाई। राहगीरों ने भी स्वर्णकारों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए न केवल झालमूरी खरीदी, बल्कि उनके इस अनूठे विरोध का समर्थन भी किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि सरकार की नीतियां और शीर्ष स्तर से दिए गए बयान इसी तरह व्यापार विरोधी रहे, तो भारत की यह गौरवशाली स्वर्णकारी कला समाप्त हो जाएगी और कारीगरों को पेट पालने के लिए सड़कों पर रेहड़ी-पटरी लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
आजीविका पर मंडराता खतरा
विरोध प्रदर्शन के दौरान सभा को संबोधित करते हुए शुभम सेठ “गोलू” ने तीखे शब्दों में अपनी पीड़ा व्यक्त की:

"स्वर्ण व्यापार केवल व्यापार नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका और हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। सरकार के बयानों से बाजार में जो मंदी आई है, उसने गरीब कारीगरों के चूल्हे ठंडे कर दिए हैं। हम सरकार को सचेत करना चाहते हैं कि हमारी कला को खत्म न होने दें।"
लोकतांत्रिक संघर्ष की चेतावनी
व्यापारियों ने मांग की है कि सरकार को ऐसे बयानों और नीतियों से बचना चाहिए जो इस उद्योग की कमर तोड़ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यह केवल एक प्रतीकात्मक शुरुआत है। यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ और व्यापारियों के हित में कदम नहीं उठाए गए, तो स्वर्णकार समाज अपने अधिकारों के लिए और भी उग्र लोकतांत्रिक आंदोलन करने को बाध्य होगा।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख चेहरे
वाराणसी के सर्राफा जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्तियों ने इस प्रदर्शन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
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सूरज दयाल सेठ, किशन सेठ, मुकुंद सेठ
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सुनीति सिंह, राज सेठ, विशाल सेठ
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चेतन सोनी, विष्णु दयाल सेठ, सुजीत सेठ
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संदीप सेठ (पिंडरा), सुभाष सेठ, सुरेंद्र सेठ आदि।
