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वाराणसी : सर्किट हाउस में किसानों का जबर्दस्त हंगामा, प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर निकल गये केंद्रीय मंत्री

पिंडरा विकास खंड में काशी द्वार योजना से प्रभावित किसान लम्बे समय से हैं आंदोलित

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पोस्टर लेकर नारेबाजी करते सर्किट हाउस में घुस गये किसान, मंत्री को घेरकर दिया ज्ञापन

कहा-किसानों को उजाड़कर कोई विकास नही हो सकता, करोड़ों की जमीन का मुआवजा लाखों में, नहीं देंगे एक इंच भी जमीन

वाराणसी, भदैनी मिरर। सर्किट हाउस में केंद्र सरकार के बजट की खूबियां बताने वाराणसी पहुंचे केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान को काशी द्वारा योजना से प्रभावित किसानों के जबर्दस्त विरोध का सामाना करना पड़ा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ही दर्जनों किसान पोस्टर लिये और नारेबाजी करते सर्किट हाउस में घुस गये। काफी बहस और नोकझोंक के बाद केंद्रीय मंत्री ने उनका ज्ञापन लिया और सरकार तक बात पहुंचाने का आश्वासन दिया। लेकिन हंगामे की वजह से उनको प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले जाना पड़ा। हालांकि इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी दस किसानों को हिरासत में ले लिया। कैंट इंस्पेक्टर ने कुछ किसान नेताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके मोबाइल छिनवा लिये। हालांकि यह पहला मौका था कि किसानों के हौंसले के आगे सत्ता के लोग बेवश और लाचार दिखे। उन्हें पुलिस की मदद लेनी पड़ी।

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वाराणसी में केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्रीय बजट की खूबियां बताने जा रहे थे। इसकी भनक काशी द्वार योजना से प्रभावित किसानों को लग चुकी थी और वह भी बड़ी संख्या में अपनी बात रखने के लिए पहुंच गये थे। मंत्री के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, भाजपा नेता हंसराज विश्वकर्मा आदि मौजूद थे। तबतक किसानों की टोली सर्किट हाउस में नारेबाजी करती हुई प्रवेश कर गई। प्रदर्शनकारियों में महिलाएं भी थी। सुरक्षा के भी तगड़े इंतजाम थे लेकिन इस बार किसान भी तय करके आए थे कि अपनी बात वह मंत्री के सामने रखेंगे। नेताओं ने उन्हें परम्परागत ढंग से टरकाने और आश्वासनों की घुट्टी पिलाने का प्रयास किया लेकिन किसान नही माने। किसानों का मिजाज देख पार्टी के नेताओं ने भी शांत रहना बेहतर समझा। किसान मंत्री के सामने गये, ज्ञापन दिया। कहाकि विकास करिए लेकिन किसानों को उजाड़कर विकास नही किया जा सकता। यह बात सरकार को समझ लेनी चाहिए। काशी द्वार  योजना में किसानों की करोड़ों की जमीन लाखों में खरीद कर कालोनियां बसाई जायेगी। सरकार और बिल्डरों की कमाई होगी और किसान बर्बाद होंगे। हम ऐसी योजना को क्रियान्वित नही होने देंगे। 

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किसानों ने अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे को लेकर सवाल किए और केंद्रीय मंत्री को घेर लिया। मंच के करीब आकर बहस करने लगे तो कहासुनी भी हुई। काफी देर तक हंगामा होता रहा। हालात बिगड़ते देख मंत्री कमलेश पासवान मंच से उतरे और बाहर चले गए। मंत्री के जाने के बाद भी हंगामा होता रहा। स्थानीय नेताओं ने पुलिस बुला ली। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 10 किसानों को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिये जाने के दौरान कैंट इंस्पेक्टर ने कुछ किसान नेताओं से दुर्व्यवहार किया और उनके मोबाइल छीनवा लिए। गौरतलब है कि पिंडरा के किसान लम्बे समय से काशी द्वार योजना का विरोध कर रहे हैं। अब जब किसानों ने मंत्री को घेर लिया तो उन्होंने और उनके साथ के नेताओं ने उन्हें समझाने का काफी प्रयास किया। किसान नही माने। मामला बढ़ता देखकर मंत्री मौके से रवाना हो गए। उनके पीछे भाजपा के स्थानीय नेता भी निकल गए। इस दौरान किसानों ने कहाकि वह किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। विरोध प्रदर्शन में मानापुर, चनौली, चकइन्दर और जद्दुपुर के किसान शामिल रहे।

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पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को हॉल में ही घेर रखा था। किसानों ने कहाकि वह किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देंगे। अगर जरूरत पड़ी तो जेल भी जाने को तैयार हैं। किसानों ने बताया कि सरकार पिंडरा तहसील क्षेत्र के 10 गांवों की 800 एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहित करना चाहती है। इस जमीन पर काशी द्वार आवासीय योजना के तहत हाईटेक कॉलोनी बनाई जानी है। आवास विकास परिषद 7 गांवों में सर्वे पूरा कर चुका है, लेकिन 3 गांवों में किसानों के विरोध के कारण काम रुका हुआ है। कहाकि करोड़ों की जमीन का मुआवजा लाखों में दिया जा रहा है। डीएम सर्किल रेट नही बढ़ाया गया। रजिस्ट्री रोक दी गई। हमारे खेत छीनने के बाद अब हम बेकार हो जाएंगे। नियमानुसार निर्धारित मुआवजा न मिल पाने से वह दूसरी जमीन भी नही खरीद पा रहे हैं। उधर, एसीपी कैंट नितिन तनेजा का कहना था कि मंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस पहले से निर्धारित था। इसी दौरान कुछ किसानों ने मुआवजे को लेकर प्रदर्शन किया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अनुचित तरीके से अपनी बात रखने लगे। इसलिए कुछ किसानों को हिरासत मे लिया गया।