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वाराणसी: कबीरचौरा अस्पताल में डॉक्टरों की गुंडागर्दी! समय से पहले ओपीडी बंद, 200 मरीज बिना इलाज लौटे, महिला डॉक्टर पर बदसलूकी का आरोप

डलीय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल: तपती धूप में भटकते रहे दूर-दराज से आए मरीज

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वाराणसी। शिव की नगरी काशी के सबसे बड़े मंडलीय अस्पताल (कबीरचौरा) में डॉक्टरों की संवेदनहीनता का बड़ा मामला सामने आया है। शनिवार को यहाँ बिना किसी सूचना के ओपीडी को निर्धारित समय से एक घंटे पहले ही बंद कर दिया गया। आलम यह रहा कि तपती धूप में दूर-दराज से आए करीब 200 मरीज बिना इलाज के ही वापस लौटने को मजबूर हो गए। इस दौरान महिला डॉक्टरों द्वारा मरीजों से अभद्रता की खबरें भी सामने आई हैं।

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डॉक्टरों की मनमानी: समय से पहले ही चैंबरों पर लटके ताले

अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, शनिवार को लगभग 1000 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। नियमानुसार ओपीडी दोपहर 2 बजे तक चलनी चाहिए, लेकिन ईएनटी और स्किन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के डॉक्टर दोपहर 1 बजे ही अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर चलते बने। मरीजों का आरोप है कि ईएनटी सर्जन डॉ. नेहा वर्मा ने इलाज के लिए पहुंचे लोगों से न केवल बदसलूकी की, बल्कि बिना मर्ज सुने ही खानापूर्ति के लिए दवाएं लिख दीं।

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केस स्टडी: सिस्टम की लाचारी

  • केस 1: सिगरा के विकास सिंह कान के इन्फेक्शन से परेशान थे। 12:35 पर जब वह डॉक्टर के पास पहुँचे, तो उन्हें "समय से आया करो" कहकर डांट दिया गया और बिना सुने ही सामान्य दवाएं थमा दी गईं।

  • केस 2: गोदौलिया के अंकित यादव ने जब डॉक्टर के गायब होने की शिकायत SIC से की, तो डॉक्टर ने वापस आकर ताना मारा— "जरा-जरा सी बात पर शिकायत करने पहुँच जाते हो।"

स्किन विभाग और प्राइवेट मेडिकल का 'नेक्सस'

अस्पताल के गलियारों में चर्चा है कि स्किन विभाग की पूरी व्यवस्था एक निजी मेडिकल स्टोर संचालक का भाई संभालता है। आरोप है कि डॉक्टर केवल उसी मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखते हैं और बदले में वह शख्स डॉक्टर के जाने के बाद चैंबर बंद करने और फाइलें व्यवस्थित करने जैसी सेवाएँ देता है।

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उच्चाधिकारियों ने लिया संज्ञान

इस बड़ी लापरवाही पर एसआईसी डॉ. बृजेश कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, "मरीजों को बेहतर सुविधा देना हमारी प्राथमिकता है। जिन डॉक्टरों ने समय से पहले काम बंद किया और मरीजों से अभद्रता की, उन्हें नोटिस जारी कर जवाब माँगा जा रहा है।" वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अपर निदेशक डॉ. एनडी शर्मा ने भी मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

वाराणसी के इस प्रतिष्ठित अस्पताल में ऐसी अव्यवस्था सवाल खड़ा करती है कि क्या सरकारी डॉक्टर वाकई अपनी जिम्मेदारी के प्रति ईमानदार हैं?