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वाराणसी: गोशालाओं में लापरवाही पर DM सत्येंद्र कुमार का बड़ा एक्शन, सचिव समेत दो सस्पेंड, प्रधान के अधिकार सीज

भिटकुरी गोशाला में बदहाली पर कार्रवाई; सत्तनपुर में खराब निर्माण पर प्रोजेक्ट मैनेजर और ठेकेदार पर दर्ज होगी FIR

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वाराणसी। जिले में निराश्रित गोवंशों की देखभाल और गोशालाओं के संचालन में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी (DM) सत्येंद्र कुमार ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और विभिन्न विभागों के आला अधिकारियों के साथ गोशालाओं की व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक के दौरान काम में घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर डीएम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्राम पंचायत सचिव सहित दो लोगों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि एक ग्राम प्रधान के अधिकार सीज करने के आदेश दिए हैं।

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सेवापुरी के भिटकुरी गोशाला में मिली लापरवाही, प्रधान पर गिरी गाज

जिलाधिकारी ने समीक्षा के दौरान सेवापुरी ब्लॉक के भिटकुरी गांव में स्थित वृहद गो-संरक्षण केंद्र (गोशाला) के संचालन में गंभीर कमियां पाईं। इस गोशाला को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने भी प्रशासन से शिकायत की थी। ग्रामीणों की शिकायतों और अधिकारियों की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए डीएम सत्येंद्र कुमार ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने लापरवाही के आरोप में भिटकुरी के ग्राम पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही भिटकुरी ग्राम प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने का कड़ा निर्देश जारी किया।

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घटिया निर्माण पर प्रोजेक्ट मैनेजर निलंबित, ठेकेदार पर दर्ज होगी FIR

डीएम का चाबुक सिर्फ भिटकुरी तक ही नहीं रुका। सत्तनपुर में निर्माणाधीन गोवंश आश्रय स्थल के निरीक्षण और समीक्षा के दौरान पाया गया कि वहां हो रहा निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप नहीं है। घटिया निर्माण कार्य पर भड़कते हुए जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर को सस्पेंड करने का आदेश दिया। इसके साथ ही सरकारी धन के दुरुपयोग और लापरवाही के मामले में प्रोजेक्ट मैनेजर और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा (FIR) दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं।

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गोशालाओं की व्यवस्था दुरुस्त रखने की सख्त चेतावनी

कलेक्ट्रेट सभागार में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में डीएम ने कड़े लहजे में कहा कि गोशालाओं में निराश्रित पशुओं के लिए:

  • हरे चारे, भूसे और उत्तम पशु आहार की पर्याप्त उपलब्धता हो।

  • गर्मियों को देखते हुए स्वच्छ पेयजल और शेड (छाया) की मुकम्मल व्यवस्था की जाए।

  • बीमार मवेशियों के इलाज के लिए पशु डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी रखे।

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि गोवंशों के संरक्षण में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में किसी अन्य गोशाला से भी शिकायत या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ इससे भी कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।