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वाराणसी मंडल का जलवा, लगातार चौथे महीने नंबर-1 स्थान पर जमाया कब्जा; खराब प्रदर्शन पर जौनपुर CMO को सख्त चेतावनी

अपर निदेशक डॉ. एन.डी. शर्मा की बड़ी समीक्षा बैठक; 70 पार के बुजुर्गों और आशा-आंगनबाड़ी परिवारों के आयुष्मान कार्ड एक हफ्ते में बनाने के निर्देश, अस्पतालों का होगा फायर और इलेक्ट्रिसिटी ऑडिट।

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वाराणसी (भदैनी मिरर): चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वाराणसी मंडल के अपर निदेशक डॉ. नरेन्द्र देव शर्मा की अध्यक्षता में गुरुवार (25 जून 2026) को एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अपर निदेशक सभागार कक्ष में मंडल के सभी जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों (CMOs), प्रमुख व मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (CMSs) और एनएचएम (NHM) के अधिकारियों के साथ हुई इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की बारीकी से समीक्षा की गई।

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बैठक में सबसे बड़ी खुशखबरी यह रही कि राज्य सरकार के डैशबोर्ड रैंकिंग के तहत अप्रैल 2026 तक की समीक्षा में वाराणसी मंडल लगातार चौथे महीने पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान (नंबर-1) पर रहा है। इस शानदार उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य टीम की सराहना की गई। मंडल के जिलों में वाराणसी प्रदेश में दूसरे, चंदौली तीसरे और गाजीपुर पांचवें स्थान पर रहा।

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जौनपुर की गिरी रैंक, सुधार के लिए मिला 'टारगेट 20'

एक तरफ जहां तीन जिलों के प्रदर्शन की सराहना हुई, वहीं जनपद जौनपुर की रैंकिंग पिछले महीने के 37वें स्थान से गिरकर 55वें स्थान पर पहुंचने पर अपर निदेशक ने कड़ा असंतोष व्यक्त किया। जौनपुर में गर्भवती महिलाओं की 4 एएनसी जांच, संस्थागत प्रसव, जिला व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सी-सेक्शन प्रसव, पूर्ण प्रतिरक्षण और स्पेसिंग मेथड जैसे सूचकांकों में प्रगति राज्य व मंडल के औसत से काफी कम पाई गई।

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अपर निदेशक ने सीएमओ जौनपुर को कड़ी चेतावनी देते हुए सभी सूचकांकों पर विशेष प्रयास कर एक सप्ताह में सुधारात्मक कार्रवाई करने और जौनपुर की रैंक को टॉप 20 के अंदर लाने का निर्देश दिया है।

अवैध रूप से प्रसव कराने वाले अस्पतालों पर होगी एफआईआर, तुरंत मिलेगा जन्म प्रमाण पत्र

डॉ. एन.डी. शर्मा ने कड़े निर्देश जारी करते हुए कहा कि निजी और सरकारी अस्पतालों में होने वाले सभी प्रसवों की सूचना अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। यदि कोई भी अस्पताल बिना पंजीकरण के प्रसव कराते हुए पाया जाता है, तो उन्हें चिह्नित कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाए।

  • सभी प्रसवों का 'मंत्रा ऐप' (Mantra App) पर तत्काल पंजीकरण किया जाए।

  • नवजात बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र तुरंत जारी किए जाएं।

  • जेएसवाई (JSY - जननी सुरक्षा योजना) का भुगतान लाभार्थी महिला के अस्पताल छोड़ने से पहले ही उसके बैंक खाते में सुनिश्चित कराया जाए।

  • चंदौली और गाजीपुर में स्टिल बर्थ रेशियो (मृत शिशु जन्म दर) अधिक होने पर प्रसव कक्षों में प्रशिक्षित स्टाफ तैनात करने को कहा गया।

एक हफ्ते के अंदर बनेंगे 70+ बुजुर्गों और आशा-आंगनबाड़ी परिवारों के आयुष्मान कार्ड

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) की समीक्षा करते हुए अपर निदेशक ने निर्देश दिया कि 'जीरो पावर्टी' के छूटे हुए परिवारों को चिह्नित किया जाए। इसके साथ ही:

  • आशा, आंगनबाड़ी और आंगनबाड़ी सहायिकाओं के परिवार के छूटे हुए सदस्यों के गोल्डेन कार्ड प्राथमिकता के आधार पर एक सप्ताह के भीतर बनाए जाएं। इसकी जिम्मेदारी डीसीपीएम और बीसीपीएम की होगी।

  • 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के वृद्धजनों का लक्ष्य प्राप्त हो चुका है, अतः उनके भी शत-प्रतिशत कार्ड तत्काल बनाए जाएं।

  • वाराणसी जिला बजट खर्च करने में सबसे पीछे पाया गया, जिसपर वाराणसी सीएमओ को तत्काल ज़ूम बैठक के जरिए समीक्षा कर एक सप्ताह में आशा व सीएचओ के मानदेय तथा जेएसवाई व डीबीटी का भुगतान पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

बाहर की दवाएं लिखने और दलालों के प्रवेश पर शत-प्रतिशत रोक

अस्पतालों की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए अपर निदेशक ने सख्त लहजे में कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित हो। मरीज को बाहर की दवाएं या बाहर से जांच लिखना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। ईडिएल (EDL) के अनुसार सभी दवाएं मरीजों को मुफ्त दी जाएं। अस्पतालों में सक्रिय दवा व जांच से जुड़े दलालों के प्रवेश पर शत-प्रतिशत रोक लगाई जाए। ग्रामीण क्षेत्रों के सीएचसी को 24x7 क्रियाशील रखा जाए।

फायर और इलेक्ट्रिसिटी सेफ्टी ऑडिट के कड़े निर्देश

हालिया घटनाओं के मद्देनजर सभी सीएमओ और सीएमएस को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने चिकित्सालयों का अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) और विद्युत सुरक्षा (Electrical Safety) ऑडिट तत्काल संपन्न कराएं और दमकल विभाग से एनओसी (NOC) प्राप्त करें। फायर फाइटिंग उपकरण चालू हालत में होने चाहिए और एक्सपायरी डेट के नहीं होने चाहिए। इसके लिए अस्पताल स्टाफ का मॉकड्रिल भी कराया जाए।

उन्होंने अंत में कहा कि मरीजों और तीमारदारों के प्रति डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ का व्यवहार संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्वक होना चाहिए। किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या लापरवाही की खबरें सामने आने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।